अर्पण सेवा संस्थान का भारतवर्ष में जल संरक्षण में प्रथम स्थान

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 खंडवा – जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, के तत्वावधान में  नयी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में चौथे राष्ट्रीय जल पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रथम विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। समारोह में जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, जल शक्ति एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जल शक्ति एवं जनजातीय कार्य मंत्री बिश्वेश्वर टुडू भी उपस्थित रहे। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पुरस्कार वितरण समारोह में अर्पण सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शुभकरण सिंह और कोषाध्यक्ष राजेश जैन को  जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रयास करने के लिए सम्मानित किया गया। दोनों विजेताओं को यह पुरस्कार प्रदेश में अर्पण सेवा संस्थान को सर्वश्रेष्ठ एनजीओ की श्रेणी में मिला है। पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया।

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने 11 श्रेणियों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय जल पुरस्कार के लिए कुल 41 विजेताओं की घोषणा की थी। प्रत्येक विजेता को एक प्रशस्ति पत्र और एक स्मृति चिह्न के साथ कुछ श्रेणियों में नकद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार सरकार के जल समृद्ध भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में चल रहे राष्ट्रव्यापी अभियान के हिस्से के रूप में, विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों और प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जाते हैं। चौथे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों के लिए कुल 868 आवेदन प्राप्त हुए थे जिनमें से सभी 11 श्रेणियों को शामिल करने वाले संयुक्त विजेताओं सहित 41 विजेताओं को पुरस्कार प्रदान करने के लिए चुना गया जिसमें सर्वश्रेष्ठ राज्य, एन.जी.ओ., कम्पनी, सी.एस.आर. आदि के द्वारा जल प्रबंधन पर उत्कर्ष कार्य किया गया।

अर्पण सेवा संस्थान द्वारा 5 राज्यों में समुदाय के साथ मिलकर जल संरक्षण पर बेहतरीन कार्य करते हुये 20 मिलीयन क्युमीटर रिचार्ज पोटेॅशिल बढाया है, 1 लाख 56 हजार पंपिंग ऑवर बचाये गये व पेयजल पर नवाचार करते हुए सस्ती व सुलभ तकनीकें ग्रामीण समुदाय को उपलब्ध कराने में अहम योगदान दिया जिससे विशेषकर महिलाओं की आजीविका मेंवृद्धि व बच्चों को पढाई के लिये वक्त मिलने लगा। इससे 80 लाख कि.ग्रा. सीओटू उत्सर्जन रोका है एवं पर्यावरण सुधार में योगदान दिया है।
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