भाजपा के कार्यकर्ता और प्रतिनिधि आत्मविश्वास से जीत के लिए तैयार हैं
खंडवा। विधानसभा चुनाव के लिए जिले की चारों सीटों पर कसावट व परिवर्तन का दौर जारी है। भाजपा के कार्यकर्ता और प्रतिनिधि आत्मविश्वास से जीत के लिए तैयार हैं। कांग्रेस ने भी अपने पक्ष में जनता का माहौल देखकर रफ्तार तेज कर दी है। सभी सीटों में काम बंद पड़े हैं। ऊपर से बजट नहीं आ रहा है। योजनाएं बंद कर लाडली बहनों को पैसा भेजने से और मुसीबत नजर आ रही है।
जरूरी सड़कें, ब्रिज और योजनाएं जनप्रतिनिधि आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। ऐसे में आम लोग सत्तारूढ़ पार्टी से नाराज हो रहे हैं। सिंचाई योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। किसान नाराज हैं।
शहराती क्षेत्र की बात करें, तो सड़कें बनीं और 2 महीनों में ही उखड़ गईं। ये सड़कें रातों-रात बनी थी। हंगामा भी हुआ। जांच के लिए तैयारियां हुई। बाद में रिपोर्ट जनता के सामने आई ही नहीं। पानी बदबूदार और मटमैला सप्लाई करना रोज का चाला हो गया है। मनमाने टेक्स निगम ने बढ़ाकर, जो भी चुनाव लड़ेगा उसकी मुसीबत बढ़ा दी हैं।
खंडवा में कांग्रेस इसी का फायदा उठाकर अप टू डेट हो रही है। 25 साल से गांधी भवन जर्जर हो रहा था। उसकी रंगाई पुताई का दौर चल रहा है। कार्यकर्ता 2023 से सत्ता में आकर नेतागिरी चमकाने का सपना देखने लगे हैं। बड़े नेता भी इसी स्टाइल में रोज जिलों में आकर कार्यकर्ताओं को बूस्टर डोज दे रहे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता टिफिन पार्टी जैसे घिसे पीटे फार्मूले ला रही है। संघ इस बार ज्यादा सक्रिय इसलिए नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि पहले उनका ही दबाव रहता था। बाद में सत्ता वालों की चमक और धमक बढऩे के कारण इनकी वैल्यू पर असर पड़ा है।
हरसूद विधानसभा क्षेत्र में लोग कई मामलों में परेशान हैं। हरसूद के विस्थापन से लोगों की स्थिति खराब हो गई है। अच्छी जमीन डूब में चली गई। यहां के विस्थापितों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर जो छलावा हुआ है, उसका दर्द अब उभर कर सामने आ रहा है। बिजली के कारखाने बनने के बाद, यहां बिजली व पानी पर्याप्त होने के कारण उद्योग धंधे स्थापित होने थे। एक भी नहीं हो पाए। सस्ती बिजली इस क्षेत्र को देने की बात कहीं गई थी, लेकिन महंगी बिजली विस्थापितों को मिल रही है। यहां के विस्थापितों को स्वतंत्रता सेनानी जैसा दर्जा देने की बात कहीं गई थी। बाद में यहां के बड़े किसान आज हाथ ठेला धकाने को मजबूर हैं।
मांधाता क्षेत्र में नया कुछ तो दूर, यहां के ओंकारेश्वर मंदिर को ही तरीके से सरकार सुगम नहीं बना पाई। ओंकारेश्वर और इंदिरा सागर में मछली पालन का काम बड़े भ्रष्टाचार की आंच में धूमिल हो गया। आश्चर्य की बात है कि सिर्फ कागजी आदेश से खंडवा ओंकारेश्वर मेमू ट्रेन चल सकती थी। वह भी जनप्रतिनिधियों की कमजोरी के कारण आज तक लागू नहीं हो पाई। सिंचाई योजना में मूंग की खेती के समय लहरों से में पर्याप्त पानी नहीं आ पाया। खरगोन क्षेत्र में यहां का पानी जा रहा है, जबकि खंडवा जिले के किसानों के खेत डूबे थे।
पंधाना विधानसभा क्षेत्र में तो जनता की नाराजगी फूले नहीं समा रही है। यहां अब अनुभवी जनप्रतिनिधि के हाथों में कमान की मांग उठ रही है। छैगांवमाखन उद्वहन अब तक चालू हो जानी थी। सड़कें घटिया क्वालिटी की बन रही हैं। खंडवा बाईपास योजना को केंद्र ला रहा है, जिसे राज्य सरकार अपनी बता रही है।
कुल मिलाकर भाजपा जिले की चारों सीटों पर कमजोर दिख रही है। कई क्षेत्रों में कांग्रेस इसका फायदा उठाते नजर आ रही है। यही वजह है कि जनता का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ रहा है। 20 साल में भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने टाइप्ड भाषण देकर मतदाताओं के कान पका दिए हैं। धरातल पर क्या हो रहा है? यह सब भी जनता समझ रही है। मर्डर और चाकूबाजी जैसे अपराध खंडवा जिले में कम होते थे, जो आज चरम पर हैं। डंपर से रेत और खनिज बेदर्दी से ढोया जा रहा है। बसों के परमिट में सत्ता वालों का दबाव होने के कारण आरटीओ जैसे विभाग मुसीबत में हो सकते हैं। अरबों रुपए नल जल योजना में खफा दिए जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। 90 प्रतिशत पंचायतों के काम जांच की लपटों में घिरे हुए हैं। इन्हीं क्षेत्रों के लोग विधानसभा चुनाव में वोट देंगे, जो अब चौकाने हो गए हैं।
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