गणेश पांडे,भोपाल। 2008 बैच के एक रसूखदार आईएफएस अफसर के सामने जंगल महकमे के शीर्ष अफसर झुकने को विवश हो रहे हैं। इसी कारण अब वन विभाग वर्किंग प्लान के नियमों में संशोधन किए जाने पर मंथन शुरु हो गया है। दरअसल, मुख्यालय से लेकर मंत्रालय तक के शीर्ष अफसरों ने पूरे जतन किए पर 8 महीने बीत गए पर अभी तक वर्किंग प्लान में 2008 बैच के तीन आईएफएस अफसरों की पदस्थापना नहीं कर पाए। जबकि विभाग ने दो अलग-अलग याचिकाओं में हाईकोर्ट जबलपुर और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में जवाब प्रस्तुत किया है कि वर्किंग प्लान में विलंब होने से राज्य शासन को राजस्व हानि होगी। वर्ष 2008 बैच के आईएफएस अधिकारी आदर्श श्रीवास्तव, कमल अरोड़ा, प्रेमनारायण मिश्रा और नरेश कुमार यादव को जनवरी में वर्किंग प्लान बनाने के लिए नई पदस्थापना की जानी थी पर आदेश फरवरी में जारी भी हुआ तो केवल आदर्श श्रीवास्तव की ही पदस्थापना वर्किंग प्लान में की गई। इस बैच के आईएफएस जबलपुर सर्किल में पदस्थ वन संरक्षक कमल अरोड़ा, पीसीसीएफ मुख्यालय सतपुड़ा में पदस्थ वन संरक्षक प्रेमनारायण मिश्रा और कान्हा नेशनल पार्क के डिप्टी डायरेक्टर नरेश यादव को वर्किंग प्लान में पदस्थापना आज तक नहीं हो सकी। इसके पीछे यह कहा जा रहा है कि 3 आईएफएस अफसरों में से एक अधिकारी ने अपने रसूख का प्रयोग कर वर्किंग प्लान में अपनी पदस्थापना रुकवा ली है। यानि एक अफसर की पदस्थापना रुकने से शेष 3 आईएफएस अफसरों की भी वर्किंग प्लान में पदस्थापना नहीं हो पाई है। इसका कारण भी साफ था कि सीनियर अधिकारी की पदस्थापना के बाद ही जूनियर अफसर की पदस्थापना का प्रावधान है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हरिशंकर मिश्रा और रमेशचंद्र विश्वकर्मा की वर्किंग प्लान में पदस्थापना को लेकर दोनों ने कैट और हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस प्रकरण में विभाग ने हाईकोर्ट और जबलपुर में जवाब प्रस्तुत किया है कि वर्किंग प्लान भी लंबे होने से शासन को राजस्व हानि होती है, इसलिए समय पर वर्किंग प्लान बनाया जाना जरूरी है। यही नहीं, विभाग ने हरिशंकर मिश्रा को वर्किंग प्लान आदेश को चुनौती देने पर निलंबित भी किया गया था। निलंबन आदेश में विभाग ने इस बात का विशेष तौर पर उल्लेख किया था कि वर्किंग प्लान में विलंब होने से शासन को होने वाले राजस्व हानि का जिम्मेदार कौन होगा? विभाग द्वारा उठाए गया यह सवाल आज मंत्रालय और मुख्यालय के लिए यक्ष प्रश्न बन गया है, क्योंकि कमल अरोरा, पीएन मिश्रा और नरेश यादव की वर्किंग प्लान में पदस्थापना में हो रही विलंब पर होने वाली राजस्व हानि के लिए जवाबदार कौन है..? इस सवाल के जवाब में वर्किंग प्लान के नियमों में संशोधन की बात शुरू हो गई है।
पीएन मिश्रा की चि_ी गले की फांस बनी
प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय के शिकायत एवं सतर्कता में पदस्थ पीएन मिश्रा की चि_ी वन विभाग के मुख्यालय से लेकर मंत्रालय के सीनियर अफसरों के गले की फांस बन गई है। मिश्रा ने अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया और वन बल प्रमुख आरके गुप्ता को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उनकी पदस्थापना स्वयं के व्यय वर्किंग प्लान में की जाए। मिश्रा ने इस आशय के दो पत्र लिखे हैं। गौरतलब यह है कि वन विभाग यदि मिश्रा के पत्र पर अमल करते हुए उनकी पदस्थापना वर्किंग प्लान में करता है तो उसके पहले वन संरक्षक जबलपुर कमल अरोड़ा की पदस्थापना करनी होगी। विभाग अरोरा की पदस्थापना वर्किंग प्लान में नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि मिश्रा के पत्र पर एसीएस और विभाग प्रमुख कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है।
सीएम की अनुशंसा को भी किया नजरअंदाज
वर्ष 2008 के बैच के ही आईएफएस अधिकारी अजय कुमार पांडेय वर्तमान में छतरपुर का वर्किंग प्लान बना रहें है। वर्किंग प्लान पदस्थापना के पूर्व जब वे रायसेन वन मंडल के वन संरक्षक थे, तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी पदस्थापना वर्किंग प्लान की जगह पर वन संरक्षक रीवा सर्किल पदस्थ करने की सिफारिश की थी। मुख्यमंत्री के सिफारिशी पत्र पर मंत्रालय में पदस्थ सचिव से लेकर विभाग के मुखिया तक ने यह तर्क दिया कि विभाग ने इस मामले में एक आईएफएस को निलंबित कर चुका हैं, इसलिए अजय पांडेय को भी वर्किंग प्लान में ही पदस्थापना किया जाना उचित होगा। अब विभाग के मुखिया से लेकर एसीएस तक के पूर्व में दिए गए तर्क बेमानी से नजर आ रहे हैं।
इनका कहना है…
तीनों आईएफएस अफसरों को वर्किंग प्लान में पदस्थ करने का प्रस्ताव राज्य शासन में विचाराधीन है। हां, पीएन मिश्रा और कुछ अन्य आईएफएस अफसरों ने पत्र लिखकर वर्किंग प्लान बनाने की इच्छा व्यक्त की है। अब विभाग वर्किंग प्लान के नियमों में संशोधन पर विचार कर रहा है।
आरके गुप्ता, वन बल प्रमुख
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