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Sunday, 11 October 2026
हरदा

अब बकाया पिछले टैक्स की वसूली जीएसटी में

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अनोखा तीर, हरदा। देश में लागू हुई जीएसटी कर प्रणाली के बाद यह माना गया था कि इस टैक्स में सभी कर शामिल हैं। इसे लागू होने के बाद तकनीकी कारणों से पुरानी टैक्स प्रणाली के बकायादारों से वसूली नहीं की गई थी। मगर अब विभाग पुरानी कर प्रणाली के पिछले बकायेदारों से इसकी वसूली प्रारंभ करेगा। इससे राज्य सरकार के खजाने में करोड़ों का राजस्व आने की संभावना है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसकी वसूली अब जीएसटी अंतर्गत होगी। ज्ञात हो कि जुलाई 2017 से देश और प्रदेश में एक देश-एक कर के नारे के साथ जीएसटी लागू किय गया था। तब प्रदेश में वैट, सेंट्रल सेल्स टैक्स व अन्य कर लागू थे। अब इनके पुराने बकायादारों का हिसाब खंगालकर प्रदेशस्तरीय वसूली अभियान चलेगा।

बकायादारों की सूची खंगाल रहे

मप्र वैट अधिनियम के साथ केंद्रीय विक्रय कर, मप्र विलासिता मनोरंजन और विज्ञापन कर अधिनियम के तहत भी वसूली की जा सकेगी। विभाग के अधिकारी बकायादारों की सूची खंगाल रहे हैं। अनुमान है कि प्रदेश के खजाने में इस अभियान से करोड़ों की राशि आएगी। अब तक यहां जीएसटी लागू हुए 6 साल हो चुके हैं। तो सवाल उठता है कि वाणिज्यिक कर विभाग की यह वसूली क्या लापरवाही में लेट हुई? दरअसल यह देरी चतुराई के साथ की गई ताकि राजस्व मप्र की जेब में ही जमा रहे। बताया जा रहा है कि कर प्रणाली बीते दौर में दूसरी रही हो लेकिन विभाग जीएसटी के खातों से टैक्स वसूली कर सकेगा। यहां वसूली में देरी जानबूझकर की गई है ताकि पैसा प्रदेश की जेब में ही रहे।

5 जुलाई तक वसूली के आदेश जारी

 जानकारी के मुताबिक वाणिज्यिक कर विभाग के स्टेट जीएसटी वसूली कक्ष ने गत 6 जून को एक आदेश जारी किया है। इसमें प्रदेश के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जीएसटी लागू होने के पूर्व के अधिनियम अंतर्गत बकाया राशि की वसूली करें। उन्हें 5 जुलाई तक वसूली का कार्य संपन्न करने का आदेश भी दिया गया है।

पहले वसूली होती तो केंद्र लेता

इसमें कर वसूलने का भी प्रावधान है। यहां कर निर्धारण पुराने अधिनियम में है लेकिन उसकी वसूली जीएसटी से हो सकेगी। यह नियम जीएसटी होने के समय से ही लागू था, किंतु वर्षों तक केंद्र सरकार जीएसटी करने के एवज में प्रदेश को क्षतिपूर्ति राशि दे रही थी। यदि राज्य यह पहले वसूलता तो केंद्र सरकार क्षतिपूर्ति में जोड़ती और राज्य को कम क्षतिपूर्ति राशि मिलती।

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