अनोखा तीर, हरदा। इस बार 19 जून सोमवार से विक्रम संवत अंतर्गत आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा पर गुप्त नवरात्र आरंभ होने जा रहे हैं। यह देवीभक्त साधकों के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। आर्द्रा नक्षत्र, वृद्धि योग, तथा मिथुन राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा। इस बार के ये नवरात्र पूरे 9 दिनों के रहेंगे। नवरात्र के 9 दिनों में मां दुर्गा की विशिष्ट साधना होगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार 52 शक्तिपीठ अथवा सिद्धपीठों पर उपासना का विशेष महत्व है। 27 जून को गुप्त नवरात्र का समापन होगा। इसी दिन भट्टाली नवमी का भी अबूझ मुहूर्त आएगा। यह मुहूर्त नवरात्र की पूणाहुति के साथ-साथ किसी विशिष्ट कार्य की शुरूआत, नई दुकान का शुभारंभ, गृह आरंभ आदि दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है। इन शुभ मांगलिक कार्यों की शुरूआत के लिए उपयोग किया जा सकता है।
वर्ष में चार नवरात्र
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार वर्ष भर में चार नवरात्र होते हैं। इनमें दो गुप्त और दो प्रकट नवरात्र मनाए जाते हैं। इस प्रकार क्वार मास शरदकालीन तथा चैत्र मास में ग्रीष्मकालीन प्रकट नवरात्र सामान्यजनों के लिए होते हैं। वहीं गुप्त नवरात्र देवी साधकों के लिए होते हैं। ये आषाढ़ और माघ माह के नवरात्र गुप्त तथा चैत्र व अश्विन के नवरात्र को प्रकट नवरात्र की संज्ञा दी गई है।
तिथि का बढ़ना शुभ
गुप्त नवरात्र में तिथि का बढ़ना श्रेष्ठ होता है। यह साधना की सफलता के लिए श्रेष्ठ संकेत माना जाता है। इस दृष्टि से इस दौरान की जाने वाली साधना उपासना मनोवांछित फल देने वाली होती है।
ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन भी होंगे
ग्रहगोचर तथा परिभ्रमण की गणना से देखें तो 19 जून से लेकर 3 जुलाई के मध्य अलग-अलग ग्रहों के नक्षत्र परिवर्तन एवं बुध ग्रह का राशि परिवर्तन होगा। 30 जून को मंगल का भी राशि परिवर्तन होगा। इसका प्रभाव शासन प्रशासन की प्रक्रिया में सुधार के रूप में दिखाई देगा। वहीं बुध का राशि परिवर्तन व्यापारिक बढ़ोतरी व उन्नति के साथ-साथ व्यवसाय के विस्तार के रूप में दिखाई देगा।
साधना के लिए श्रेष्ठ समय
देवी भागवत के अनुसार नवरात्र में चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की पूर्णता तथा संतान उत्पत्ति व पदोन्नति लिए विधिवत साधना उपासना का अनुक्रम बताया गया है। योग्य आचार्य के सानिध्य में देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए वैदिक उपासना का अनुसरण करना चाहिए।
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