पेट्रोल पंप पर जीरो देखने से भी ज्यादा जरूरी है शुद्धता चेक करना

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खंडवा- बाइक या कार रखने वाले लोग काफी जागरुक है। गाड़ी में पेट्रोल या डीजल डलवाते समय 0 (जीरो) पर ध्यान देना बिलकुल नहीं भूलते। परंतु, क्या पेट्रोल भरवाते वक्त पंप मशीन की डिस्प्ले पर जीरो देख लेना भर काफी है? नहीं।
यह काफी नहीं है। आपको इसके साथ एक और बात का ध्यान रखना चाहिए। वह है मिलावट। जीरो देखने से आपको माप तो पूरा मिल जाएगा, लेकिन प्योरिटी अथवा शुद्धता चेक करना भी उतना ही जरूरी है। बड़ी बात तो यह है कि जिले में 5 साल से पेट्रोल पंपों पर इससे संबंधित कार्रवाई नहीं हुई। यदि कोई कार्रवाई हुई भी तो, कागजों और फाइलों में दबाकर अफसरों ने पेट्रोल पंप मालिकों को फायदा पहुंचाया।
क्योंकि लंबे समय से कारवाई वाले पेट्रोल पंप की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। आखिर कुछ पेट्रोल पंप मालिकों और कुछ संबंधित विभागों के अफसरों के बीच सांठगांठ क्या है? यह पेट्रोलियम मंत्री के भी नालेज में आना चाहिए कि खंडवा जिले में क्या चल रहा है?
आज हम आपको पेट्रोल-डीजल की शुद्धता से जुड़ी अहम जानकारी दे रहे हैं, ताकि मात्रा के साथ-साथ आपको शुद्ध ईंधन भी मिले। यह आपके वाहन की बेहतर लाइफ के लिए जरूरी है। पेट्रोल कितना शुद्ध है इसका पता भी आप पंप मीटर में देखकर ही लगा सकते हैं। जी हां, पंप के मीटर पर ही शुद्धता का सूचकांक भी होता है।

कैसे चेक करें डेंसिटी?

दरअसल पेट्रोल-डीजल की डेंसिटी उसकी शुद्धता से संबंधित है, जिन्हें आप आसानी से जान सकते हैं। सरकार ने फ्यूल डेंसिटी के स्टैंडर्ड तय किए हैं, जिनकी मदद से आप जान सकते हैं कि आपको मिल रहा पेट्रोल-डीजल कितना शुद्ध है। क्योंकि अक्सर ईंधन में मिलावट की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर फ्यूल डेंसिटी की जांच कैसे करें? इसे चेक करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि यह जानकारी पेट्रोल भरने वाली मशीन के डिस्प्ले पर होती है। पेट्रोल की रसीद पर भी डेंसिटी लिखी होती है! अगर आप इससे संतुष्ट नहीं होते हैं तो पंप पर उपलब्ध डेंसिटी जार से इसकी जांच करवा सकते हैं।

ईंधन से जुड़ी डेंसिटी के मानक

हर पदार्थ का एक निश्चित घनत्व होता है और ईंधन के साथ भी ऐसा ही है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल की डेंसिटी के मानक तय कर रखे हैं। पेट्रोल की डेंसिटी 730 से 800 किलोग्राम प्रति घन मीटर है। वहीं, डीजल की शुद्धता का घनत्व 830 से 900 किग्रा/एम3 के बीच बताया होता है. हालांकि, इसकी रेंज फिक्स नहीं होती है और तापमान में बदलाव इसका कारण होता है।

पंपों से सेंपल लिये,सार्वजनिक नहीं किए

जिले में चाहे जब पेट्रोलियम पदार्थों पर सरकारें मूल्यवृद्धि से उपभोक्ताओं को परेशान करती रहती हैं। दूसरी ओर जिले का खाद्ध विभाग भी इन पदार्थों की गतिविधियों पर रोक लगाने में अक्षम साबित हो रहा है।
आश्चर्य की बात तो यह है कि इस सब खेल की जानकारी प्रशासन व खाद्ध विभाग दोनों को है। लेकिन चैक करने के नाम पर रजिस्टरों में केवल चेक करने की इंट्री वाली औपचारिकताएं निभा दी जाती हैं। उपभोक्ताओं में से कुछ शिकायतें भी करते हैं तो कार्रवाई को जटिल बनाकर इसे टाल दिया जाता है। कुछ जगह चैक  करने के नाम पर सैंपल एकत्रित कर लिया जाता है। इसे परीक्षण लेबोरेटरियों में भेज भी दिया जाता है। लेकिन पिछले पाँच साल का रिकार्ड देखें तो विभाग ने एक भी ऐसी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है, जिसमें अमानक स्तर का पेट्रोल पाया गया हो? सवाल यह उठता है कि क्या खंडवा जिले के डेढ़ सौ से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर मानक स्तर का खालिस शुद्ध पेट्रोल व डीजल मिल रहा है? यदि ऐसा है तो इस तरह के इमानदार व्यवसाय की देखरेख के लिये खाद्ध विभाग के  अफसरों को कलेक्टर ने सम्मानित क्यों नहीं किया? इसमें गलती किसकी है इस बात को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिये।
विभाग द्वारा बाकायदा समय समय पर पेट्रोल पंपों पर मिलावट और कम तौलन की शिकायतें दूर करने के लिये अभियान भी शुरू किया जाता है। इसका असर केवल महानगरों में दिखता है। खंडवा जैसे मध्यम स्तर के शहरों में तो कागजी लीपापोती ही हो जाती है। राजमार्गों पर बने पंपों के तो अधिकतर दिशा निर्देश हवा कर दिये गए हैं। नब्बे फीसदी से ज्यादा बिक्री बिना पर्चियों की हो रही है। कमीशन बढऩे के बाद पेट्रोल पंप का धंधा बड़े मुनाफे का हो गया है।

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