आप जो यह तस्वीर देख रहे हैं, वह शहर के मुख्य बाजार घंटाघर क्षेत्र का नजारा है। जहां कपड़ा बाजार में लोगों के आने-जाने के लिये पर्याप्त जगह तक नही दिखती है। साचिये, ऐसे में दिनभर क्या आमल रहता होगा ? दरअसल, कपड़ा बाजार की गली नंबर एक इन दिनों वाहन पार्किंग में तब्दील है। सुबह होते ही यहां वाहनों की कतार लगना शुरू हो जाती है। इसका क्या कारण है ? यह तो नही पता। परंतु , इस मनमानी या यूं कहें कि वाहन खड़ा करने की मजबूरी के चलते बाजार की सूरत बदल गई है। कुछ यही हाल गली नंबर तीन यानि बीच की गली छोड़कर सभी जगह अव्यवस्था फैली हैं। जिस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। क्योंकि बाजार में शहरवासियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी खरीददारी के लिये पहुंचते हैं। वहीं तीज-त्यौहार तथा शादी-सराय के वक्त बाजार में भारी रस रहता है। नागरिकों के मुताबिक इन सब बातों को दृष्टिगत रखकर व्यवस्था का विस्तार किया जाना चाहिये। जिसमें बेरिकेट्स , रूट डायवर्ट प्लान , नो एन्ट्री में दाखिल होने पर चालानी कार्रवाई समेत अन्य महत्वपूर्ण कदम उठायें जाने की दरकार है। तभी व्यवस्था सुधार तथा चुस्त-दुरूस्त तस्वीर देखने को मिलेगी। फिलहाल इन सबके अभाव में लोग इतना जरूर कह देते हैं, कि यह बात गलत है।
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