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Saturday, 24 October 2026
देवास

महादेव अविनाशी, निराकार स्वरूप हैं, वे हमेशा भक्तों पर दया करते हैं

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देवास- पुराणों में शिव-पार्वती के विवाह का उल्लेख बहुत सी जगह मिलता है। कहा जाता है की शिव और पार्वती का विवाह जिस दिन हुआ था उसी दिन हम महाशिवरात्रि मानते हैं। माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी। सभी देवता इस रिश्ते से खुश थे और सभी चाहते थे की पर्वत राजकन्या माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह हो। उक्त उद्गार उक्त उद्गार रामेश्वर धाम मंदिर एवं समस्त भक्तगणों के सहयोग से रामनगर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के तीसरे दिन पं. दीपक महाराज ने कही।

समिति सदस्य ने बताया कि कथा में हर्षोल्लास के साथ शिव-पार्वती जी का विवाह उत्सव मनाया गया। भक्तों ने भजनों पर विवाह उपरांत जमकर नृत्य किया और शिव-पार्वती विवाह पर फूलों की वर्षा की। इस दौरान कथा पंडाल को आकर्षक रूप से सजाया गया। कथा परिसर के आसपास भूतों की टोली से शिव बारात निकाली गई। महाराज श्री ने आगे कहा कि ऐसे भक्त जिनके मुख से शिव के नाम का उच्चारण सुनने को मिले उनके दर्शन मात्र से ही जीवन सफल हो जाता है। उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल भगवान का स्मरण करने से ही पापों का नाश हो सकता है।

त्रेता युग राम भगवान, द्वापर युग श्रीकृष्ण भगवान का युग था तो कलयुग भगवान  शिव का युग है, यहां कण कण में शिव विराजित है। उन्होंने कहा कि महादेव अविनाशी, निराकार स्वरूप हैं। वे हमेशा भक्तों पर दया करते हैं। जो भी श्रद्धालु पवित्र मन से आस्था के साथ शिव महापुराण का पूजन करते हैं, उन्हें निश्चित तौर पर शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शिव निंदा कभी नहीं सुनना चाहिए। जिस स्थान पर ईश्वर की निंदा हो, उस स्थान को तुरंत ही छोड़ देना चाहिए। कथा  प्रतिदिन दोपहर 3 से सायं 6 बजे तक चलेगी

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