देवास- शिव को प्रसन्न करने के लिए या शिव की कृपा पाने के लिए भजन कीर्तन की नहीं सच्चे मन से बस आराधना भक्ति करने की जरूरत है। शिव तो इतने भोले है की भक्त के मन में आने वाली बात को पहले ही जान लेते है और उसकी हर मुराद पूरी करते हैं। उक्त उद्गार रामेश्वर धाम मंदिर एवं समस्त भक्तगणों के सहयोग से रामनगर में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस पं. दीपक महाराज ने कहे।
समिति सदस्य ने बताया कि कथा के दौरान सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिस पर श्रद्धालुओं ने भक्ति में मंत्रमुग्ध होकर जमकर नृत्य किया। कथा 27 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 से सायं 6 बजे तक चलेगी। कथा में आज तृतीय दिवस शिव-पार्वती जी का विवाह होगा। महाराज ने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि जब लक्ष्मीजी का विवाह होना तय हुआ तो उनके सामने सभी देवों को बैठाया गया और कहा गया कि इनमें से जो भी देवता आपको पसंद है, उनको आप वर माला पहनाएं।
इस पर लक्ष्मीजी ने बारी-बारी सभी देवताओं की ओर देखा तथा अंत में जाकर भगवान विष्णु को लक्ष्मीजी ने माला पहनाई और उसके बाद समुद्र मंथन हुआ। तब देवताओं को अमृत पिलाया गया। भगवान शंकर ने विषपान किया। कथा के दौरान समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले सभी रत्नों और आवश्यक वस्तुओं के बारे में भी बताया गया।
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