औद्योगिक क्षेत्र में जल संकट

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सचिन गौर, हरदा। जल ही जीवन है, जल के बिना न तो खेती संभव है न ही कोई उद्योग धंधे स्थापित किए जा सकते हैं। लेकिन शायद यह बात उद्योग विभाग के आला अधिकारियों को मालूम ही नहीं है। वर्षों पहले जिले में उद्योग लगाने के नाम पर उद्योगपतियों को तो बसा दिया गया। लेकिन आज तक उन उद्योगों को चलाने के लिए लगने वाले जल की व्यवस्था उद्योग विभाग नहीं कर पाया है। पूर्व में कुछ उद्योगपतियों ने अपने उद्योगों को चलाने के लिए निजी नलकूप खनन कराकर किसी तरह कार्य कर रहे थे, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण नलकूपों ने भी उनका साथ छोड़ दिया है। जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्र में लगी कई इकाइयां पानी की कमी के कारण बंद होने की कगार पर आ गई है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो अनेक औद्योगिक इकाइयों को बंद करने की नौबत सामने आ सकती है। इससे जहां शहर को जरूरी चीजों की आपूर्ति प्रभावित होगी। वहीं हजारों लोगों के हाथ से काम छिनने का भी खतरा है।

क्या है समस्या

जानकारी के अनुसार दो दशक पूर्व नगर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना कर यहां के बड़े व्यापारियों को अपनी औद्योगिक इकाई लगाने हेतु उनकी जरूरत के अनुसार भूखण्डों का आवंटन किया गया था। इसके लिए जरूरी बिजली हेतु व्यवस्था के साथ पानी के लिए टंकी भी बनवाई गई थी। मगर बाद में पानी की आपूर्ति पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। यदि इस टंकी को औद्योगिक क्षेत्र के हैंडओवर भी कर दिया होता तो वे अपने स्तर से इसका संचालन कर पाते। वर्तमान समय में सीमेंट उद्योग, दाल मिल, आटा मिल, बेकरी, पानी फिल्टर प्लांट, आइस प्लांट आदि को पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे उद्यमियों को अपनी इकाई चलाना मुश्किल हो गया है। ज्ञात हो कि इस बारे में नगर के उद्योगपतियों द्वारा कई बार विभाग से मांग की गई। मगर अभी तक औद्योगिक क्षेत्र लगी पानी की टंकी को चालू नहीं किया गया। यहां लगभग 20 वर्षों पूर्व में बनी एक लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी बंद पड़ी है। यह उपयोग में नहीं लाए जाने के कारण खराब हो रही है। जबकि यहां के उद्योगपति कमर्शियल रेट पर भी पानी लेने को तैयार हैं। इस बारे में पूछे जाने पर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष संदीप पटेल ने कहा कि हम इस बारे में व्यवस्था बनाने हेतु संबंधित विभाग अधिकारियों और नगरपालिका से भी चर्चा कर रहे हैं। इसमें शीघ्र ही कोई निर्णय ले लिया जाएगा।

शासन की लापरवाही का शिकार

शहर के उद्योगपति शासन की घोर लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। नगरीय क्षेत्र में स्थित औद्योगिक क्षेत्र वार्ड नंबर 34 में आता है। यह नगर पालिका अध्यक्ष का ही वार्ड है। मगर इस ओर उनके स्तर से भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यहां के उद्योगपतियों का कहना है कि नगर पालिका उद्योगपतियों से समस्त प्रकार का टैक्स तो लेना चाहती है। मगर सुविधा के नाम पर न तो यहां स्ट्रीट लाइट की सुविधा है, न सफाई और पानी की व्यवस्था है। इससे भी उद्योगपतियों में निकाय के प्रति नाराजी है।

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