गणेश पांडे,भोपाल। आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में फतह करने के लिए नई दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर नेताओं की अहम बैठक 26 मई को बुलाई गई है। यह बैठक राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के ने बुलाई है। बैठक में चुनावी रणनीति तय की जाएगी। कर्नाटक में मिली सफलता के बाद कांग्रेस हाईकमान आत्मविश्वास से लबरेज है। अब मप्र में भाजपा को शिकस्त देने के लिए राज्य के प्रमुख नेताओं की बैठक 26 मई शुक्रवार को होने जा रही है। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविंद सिंह के अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, कांतिलाल भूरिया, अरुण यादव को बुलाया गया है। बैठक में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी शिरकत करेंगे। बैठक में राज्य में कांग्रेस संगठन की स्थिति, चुनावी संभावनाओं और लगातार पराजित हो रही विधानसभा सीटों को लेकर विशेष रणनीति तय की जाएगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को बतौर मुख्यमंत्री चेहरा के मुद्दे भी उठने की संभावना है। यहां यह उल्लेखनीय है कि कमलनाथ समर्थक विधायक, पदाधिकारी एवं पार्टी कार्यकर्ता लगातार मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ के चेहरे को प्रसारित और प्रचारित कर रहे हैं। जबकि प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव जेपी अग्रवाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस किसी चेहरे के रूप में मुख्यमंत्री को प्रोजेक्ट नहीं करेगी। कांग्रेस की परंपरा रही है कि विधायक दल की बैठक और पार्टी हाईकमान मुख्यमंत्री का निर्णय करती है। पिछले दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत्र ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही संदेश दिया है कि कांग्रेस किसी को भी मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चुनाव नहीं लड़ेगी।
सर्वे में 2 दर्जन से अधिक विधायकों की स्थिति कमजोर
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ के आंतरिक सर्वे के अनुसार आगामी विधानसभा चुनाव में फिलहाल 2 दर्जन से अधिक विधायकों की स्थिति कमजोर है। यानी उनकी जीत को लेकर लेकर संशय है। मसलन, खरगोन जिले की 2 विधानसभा क्षेत्र भीकनगांव, महेश्वर, और खरगोन विधानसभा क्षेत्र में जयस ने कांग्रेस के समीकरण को बिगाड़ दिया है। इसी प्रकार बड़वानी जिले की सेंधवा विधानसभा क्षेत्र में ग्यारसी लाल रावत और थांदला में वीर सिंह भूरिया की जीत को लेकर कांग्रेस संशय में हैं। कमोबेश यही स्थिति धार जिले की धरमपुरी, मनावर और सरदारपुर की है। इंदौर में संजय शुक्ला और जीतू पटवारी और भोपाल में पीसी शर्मा की जीत पर असमंजस के बादल मंडरा रहे हैं। बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी और भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र में जयस की सक्रियता से कांग्रेस की जीत का समीकरण गड़बड़ा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की कर्मस्थलीय जिला छिंदवाड़ा 7 में से 3 विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस बीजेपी के मुकाबले कमजोर है। दिलचस्प पहलू यह है कि भाजपा आलाकमान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को छिंदवाड़ा में ही खेलने की विशेष रणनीति तैयार करनी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ स्वयं यह मानते हैं कि बुंदेलखंड में कांग्रेस की स्थिति ठीक नहीं है। यानी आलोक चतुर्वेदी, विक्रम सिंह नातीराजा और नीरज विनोद दीक्षित की जीत पर दुविधा बनी हुई है।
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