रिसाव से सूखा बांध- सिंचाई सहित पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीण

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शैलेन्द्र कुमार, नर्मदापुरम। प्राय: बांध उन जरूरतों के लिए बनाए जाते हैं जिनकी पूर्ति बारिश और भू स्तरीय जल से संभव नहीं हो पाती। बांध के जल का एक महत्वपूर्ण उपयोग कृषि को सिंचित करना भी रहा है। यही नहीं किसानों के लिए बांध का जल संवैधानिक अधिकार भी है। आदिवासी अंचल केसला का खोरीपुरा डेम इन दिनों जर्जर खस्ताहाल अवस्था मे आ गया है। बारिश के दिनों में डेम में पानी लबालब भर जाता है, लेकिन डेम में जगह-जगह सीपेज होने से चार माह में पानी से लबालब भरा डेम खाली हो जाता है। डेम का गेट अब ऑपरेशनल नहीं बचा जिससे खेतों की सिंचाई बंद हो गई। अब गरीब आदिवासी ग्रामीण फिर आसमान की ओर टकटकी लगाकर देखने को मजबूर हैं कि कोई उनकी इस समस्या का हल निकालने आ जाये।

25 साल में ही हो गया बदहाली का शिकार

25 वर्ष पहले जब डेम का निर्माण हुआ है तबसे विभाग ने किसी भी तरह का मरम्मत कार्य की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। विभाग की लापरवाही की वजह से डेम जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। डेम में एक गेट का निर्माण भी किया गया है जो रखरखाव के अभाव में जाम हो गया है। किसानों की फसल सिंचाई और वाटर लेवल बढ़ाने के लिए जल संसाधन विभाग ने आज से 25 वर्ष पूर्व डेम का निर्माण कराया था। ताकि बारिश के समय मे पानी से लबालब होने के बाद डेम के पानी का उपयोग किसान फसल सिंचाई के लिए कर सकंे। जब से जिम्मेदार विभाग ने डेम का निर्माण कराया उसके बाद से आज तक डेम के रखरखाव और मरम्मत कार्य की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। डेम का रखरखाव नहीं होने की वजह से डेम से जगह-जगह पानी सीपेज हो रहा है। इस क्षेत्र के किसानों की कई एकड़ कृषि भूमि इसी डेम पर आश्रित है, लेकिन सीपेज की वजह से उनकी फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी उपज बेहतर नहीं हो पा रही है। इस मामले में जनपद सदस्य सुनील नागले ने बताया कि डेम क्षतिग्रस्त हो चुका है और जगह-जगह से सीपेज के कारण रिसाव है। जिससे डेम का पानी जल्दी समाप्त हो रहा है। उन्होंने विभाग से जल्दी मरम्मत कराने की बात कही है।

इनका कहना है

रिसाव एक सामान्य प्रक्रिया है। डेम सेफ्टी एक्ट के तहत बारिश के पहले और बाद में सर्वे होता है उस लिहाज से फिलहाल डैम सुरक्षित है। गेट और अन्य संसाधनों की मरम्मत कराई जाएगी।

– वीके जैन, अधीक्षण यंत्री जल संसाधन विभाग।

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