वन परोपकार निधि

गणेश पांडे, भोपाल। वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने स्थानांतरण-पदस्थापना की झंझट से अलग हटकर विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों के लिए एक नई पहल मप्र वन परोपकार निधि की शुरुआत की है। ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर मप्र वन परोपकार निधि से तत्काल डेढ़ लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, किडनी ट्रांसप्लांट और हृदय ऑपरेशन के लिए भी वन परोपकार निधि से मदद की जाएगी। मप्र वन परोपकार निधि को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभाग के मुखिया गुप्ता ने एक परिपत्र प्रबंध संचालक वन विकास निगम, एमडी राज्य लघु वनोपज संघ, पीसीसीएफ वन्य प्राणी, सभी पीसीसीएफ, सभी एपीपीसीएफ, सीसीएफ और सभी डीएफओ को भेजा गया है। सभी से अनिवार्य रूप से वार्षिक अंशदान अथवा आजीवन अंशदान बैंक खाते में जमा करने के लिए व्यक्तिगत प्रयास कर कर्मचारियों की मदद करने को कहा है। मप्र वन परोपकार निधि के संचालन के लिए दो समितियों का गठन किया है। मुख्यालय स्तर पर केंद्रीय समिति सर्किल स्तरीय समिति का गठन किया है। यह दोनों समितियां मदद के लिए आए आवेदन पर विचार करेंगी और संपूर्ण जमा राशि का 40 प्रतिशत तक की सहायता राशि स्वीकृत कर सकेगी। इसके अलावा अति विशिष्ट परिस्थिति में अधिकतम 60 प्रतिशत तक की राशि भी स्वीकृत की जा सकेगी। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि जो सदस्य 10 वर्षों तक अंशदान राशि एक साथ जमा करेंगे वे समिति के आजीवन सदस्य बन जाएंगे। वन अधिकारी, कर्मचारी अथवा दानदाता जो समिति के लिए 1 लाख या इससे अधिक अंशदान भुगतान करेंगे वह समिति के संरक्षक घोषित किए जाएंगे।

पद के आधार पर जमा किए जाएंगे अंशदान

मप्र वन परोपकार निधि में पद के अनुसार वार्षिक अंशदान जमा करने का प्रावधान किया गया है।

            अंशदान राशि

पीपीसीएफ    75000

एपीपीसीएफ    70000

सीसीएफ      60000

वन संरक्षक   55000

डीएफओ               50,000

वरिष्ठ सहायक       45000

एसीएफ/ रेंजर        40000

डिप्टी रेंजर          30000

बाबू / अकाउंटेंट      25000

वनरक्षक / ड्राइवर     20,000

वर्ष 2012 से निष्क्रिय थी मप्र वन परोपकार निधि

मध्य प्रदेश वन परोपकार निधि का गठन 1981 में किया गया था, जो वर्ष 2012 से निष्क्रिय हैं। परोपकार निधि के अंश राशि के वितरण को लेकर कई बार सवाल भी उठते रहे। अयोग्य अफसरों को उनके रसूख के आधार पर अंश राशि का वितरण किया गया। योग्य कर्मचारी सहायता के लिए भटकते भी रहे। तमाम आरोपों के कारण परोपकार निधि की सक्रियता समाप्त हो गई। कोरोना काल के दौरान अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की आर्थिक सहायता नहीं कर पाने से दुखी वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक कर वन परोपकार निधि का पुन: सक्रिय करने का निर्णय लिया गया। अब उसके क्रियान्वयन के लिए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील भी की है।

मुकदमा लड़ने के लिए भी दी जा सकेगी अंश राशि

जंगलों की सुरक्षा करने के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपराधिक मुकदमों से भी गुजरना पड़ रहा है। ताजा उदाहरण लटेरी की घटना है। इस मुकदमे में फंसे वन कर्मचारियों को अपनी जेब से रुपए खर्च कर कानूनी मुकदमा करना पड़ रहा है। विभाग के मुखिया ने मप्र वन परोपकार निधि में संशोधन कर यह प्रावधान भी जुड़वाया है कि यदि किसी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान मुकदमा दर्ज होता है तो उसकी पैरवी के लिए निधि से अंश राशि दी जा सकेगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि पूर्व में सेवानिवृत्त एपीसीसीएफ जेपी शर्मा ने ड्यूटी के दौरान फॉरेस्ट की ओर से पैरवी करने के लिए परोपकार निधि से सहायता की गुहार लगाई थी, किंतु तब नियमों में इसका प्रावधान नहीं था।

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