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Tuesday, 13 October 2026
हरदा

वनग्राम का हाल…. ग्रामीणों का कच्ची सड़क से गुजरना हुआ दुभर

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– टिमरनी ब्लॉक के सालईढ़ाना का मामला

– ग्रामीण बोले, सिर्फ कागजों पर हुआ काम

अनोखा तीर, हरदा। जिले के वनांचल में ग्रामीण सड़कों पर बुरा हाल है। कहीं गुणवत्ताहीन तो कहीं मुरूम और गिट्टी डालकर इतिश्री कर लिया गया। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि, आते-जाते वक्त खासकर रात्रि में वाहन अनियंत्रित होने का डर रहता है।  साथ ही बरसात के दिनों में यही कच्चा मार्ग लोगों की सबसे बड़ी समस्या का रूप ले लेता है। वहीं वनग्राम के नौनिहालों को स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नही रहता। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। दरअसल, जिले के वनग्राम में टेमरूबहार – गवासेन मार्ग से ग्राम करीब 2.7 किलोमीटर सालईढ़ाना मार्ग स्वीकृत हुआ था। यह निर्माण कार्य करीब  8 साल पहले मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत स्वीकृत होकर बनना प्रारंभ हुआ था, जो कि अर्थवर्क एवं मुरूम-गिट्टी  बिछाने तक सीमित रहा। आगे चलकर ना तो डामरीकरण हुआ और ना ही  क्रांकिट की सड़क बनी। जिसके चलते सालईढ़ाना समेत अन्य गांव के लोग असमंजस्य में हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस मामले को लेकर प्राय: हर स्तर पर गुहार लगा चुके हैं। परंतु अब तक कोई सार्थक परिणाम नही मिला है। बावजूद गांव के सक्रिय लोगों का प्रयास जारी है। सूरज सल्लाम, कमलेश पंद्राम, हरिदास धुर्वे एवं साहबदास कलेर ने कहा कि सालईढ़ाना गांव के अंदर से राधास्वामी प्राथमिक शाला तक सीमेंट क्रांकिट की सड़क बनी है। जबकि साहबनगर जोड़ यानि टेमरूबहार – गवासेन मार्ग से गांव तक की सड़क अधूरी है। वहीं उसके विपरीत सड़क पर निर्माण कार्य का पत्थर लग गया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इसकी पड़ताल करने पर कोई मुरूमीकरण लेवल का काम बताता है तो कोई कहता है इसे पक्का होना था। बस यही असमंजस्य ग्रामीणों के बीच बरकरार है। यहां बताना होगा कि सालईढ़ाना समेत करीबी गांव के 15 से 20 लोग केन्द्र व राज्य सरकार के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यही वजह है कि शिक्षित व सरकारी नौकरियों में पदस्थ लोग अपने गृहग्राम की इस समस्या को लेकर चिंतित हैं। वहीं सालों पहले गांव को मिली सड़क सौगात की हकीकत को जानने लिये अपनी सक्रियता बनाएं हुए हैं।

 

पत्थर से गायब महत्वपूर्ण जानकारी

हालात यह हैं कि उक्त निर्माण कार्य अपनी गारंटी अवधि तक पार कर चुका है। ये सब मौके पर लगे निर्माण कार्य संबंधी पत्थर पर उल्लेखित है। इतना ही नही, उस पत्थर पर अन्य जानकारी भी लिखी है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्य की कुल लागत तथा कार्य आरंभ करने की तिथि एवं पूर्ण होने का समय पत्थर पर अंकित नही है। जिसके चलते अक्सर लोग हैरानी में पड़ जाते हैं।

वाहनों का नियंत्रण खोना लाजमी

ग्रामीण रूपसिंह चौहान गुलरढ़ाना, रामदास वर्मा मोगराढ़ाना और मनोज धुर्वे टेमरूबहार ने कहा कि मार्ग पर गिट्टियां पड़ी हैं। जिसके चलते दोपहिया वाहन चालकों को खासी समस्या होती है। उनके वाहन अनियंत्रित होने के साथ-साथ दुर्घटनाग्रस्त तक हो जाते हैं। उन्होंनें कहा कि यही समस्या रात्रि में ओर अधिक गहरा जाती है। जिसका स्थायी समाधान किए जाने की जरूरत है।

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