बुद्धि और बल में बुद्धि ही प्रधान है, बुद्धिमान व्यक्ति ही महान कार्य कर सकता है

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देवास : श्री कैलादेवी मंदिर प्रांगण में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के छठवें दिवस पं. महेश गुरुजी उज्जैन ने कहा कि पार्वती मैया की सखिया जया और विजया ने पार्वती से कहा कि हमारा भी कोई विश्वसनीय सेवक होना चाहिए तो पार्वती मैया ने अपने शरीर के ऊपर से गणेश भगवान को प्रकट किया और उनको दरवाजे पर खड़ा कर दिया। उसी समय भगवान शंकर आए तो गणेश जी ने उनको रोक दिया परिणाम स्वरूप भगवान शिव ने गणेश जी का सिर त्रिशूल से काट दिया। पार्वती मैया ने अपनी शक्तियां प्रकट की। महाप्रलय की स्थिति पैदा हुई तो सभी देवताओं ने पार्वती से प्रार्थना की तो उन्होंने कहा कि मेरे गणेश को जिंदा करके और उनको सभी देवताओं में अग्र पूज्य मान लिया जाए। उनकी पहले पूजा की जाए तभी यह प्रलय से आप लोग बच सकते हैं। सभी देवताओं ने सब भगवान शंकर से प्रार्थना की। शंकर भगवान ने पार्वती के प्रस्ताव को स्वीकार किया और उत्तर दिशा में दक्षिण की तरफ पैर करके लेटे हुए हाथी का सिर लाकर गणेश जी को लगा दिया। जब गणेश जी जिंदा हुए तो सिंदूर डूबा केतकी के फूल इत्यादि से देवताओं का पूजन किया। सिंदूर को देखकर के माता पार्वती बहुत प्रसन्न हुई और उन्होंने उसी समय कहा कि आज से गणेश जी को जो भी सिंदूर लगाकर पूजन करेगा उसके मांगलिक कार्यों की सभी विघ्न बाधाओं को गणेश जी दूर किया करेंगे। गुरुजी ने आगे कहा बुद्धि और बल में बुद्धि ही प्रधान है बुद्धिमान व्यक्ति ही महान कार्य कर सकता है और वही ज्यादा सफल माना जाता है। गोपाल ठाकुर ने बताया कथा में मुख्य अतिथि पूर्व पाठ्य पुस्तक निगम अध्यक्ष राय सिंह सेंधव एवं पार्षद अजब सिंह ठाकुर थे। व्यासपीठ की आरती मुख्य यजमान सचिन अंकिता व्यास परिवार ने की।

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