अनोखा तीर, भोपाल। जंगलों की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े 1992 बैच के आईएफएस पुरुषोत्तम धीमान ने मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ का मछली उत्पादन 2 गुना बढ़ा दिया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा। गौरतलब पहलू यह है कि करोना महामारी का असर भी मछली उत्पादन पर नहीं पड़ा। वित्तीय वर्ष 2022-23 में २ लाख 99 हजार टन से अधिक का उत्पादन हुआ है। राज्य में मछली उत्पादन पिछले पांच वर्षों में दोगुना हो गया है। मछुआरा कल्याण और मत्स्य विकास विभाग के अनुसार, मछली उत्पादन जो 2017-2018 में 1 लाख 43 हजार 419 टन था, 2022-23 में बढ़कर 2 लाख 97 हजार 300 टन से अधिक हो गया है। अधिक उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ को पुरस्कृत किया। बालाघाट जिले को मत्स्य पालन के क्षेत्र में देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिले के रूप में चुना गया है। मप्र में पाई जाने वाली लगभग सभी प्रजातियों में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई। सरकार इसे और आगे ले जाना चाहती है और अगले महीने की शुरुआत में इस क्षेत्र के लिए राज्य के बजट में घोषणाएं होने की उम्मीद थी। मप्र में मछली की नस्लों की विशिष्टताओं में कैटला, लेबियो रोहिता रोहू, सिरिनस मृगला मृगल, कॉमन कार्प साइप्रिनस कार्पियो शामिल हैं। सिल्वर कार्प हाइपोफथाल्मिचिथिस मोलिट्रिक्स, ग्रास कार्प क्टेनोफेरिंगोडोन इडेला, लेबियो बाटा, लेबियो कैलबासु, पुंटियस सराना, पुंटियस गोनियोनोटस, सिरिनस सिरोहोसा, लेबियो फिम्ब्रियाटस, सिरहिनस रेबा, मागुर, सिंघी, ओमपाक एसपीपी, चीताला प्रजाति, अनाबास टेस्टुडीनस, मुर्रेल्स, वैलागो एटू, पंगेसियस, मिस्टस प्रजाति, ट्राउट, सैल्मन और स्कैम्पी प्रजाति की मछली प्रमुख है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6 फरवरी को राज्य बजट तैयार करने एवं केन्द्रीय बजट 2023-24 की समीक्षा के संबंध में प्रस्तुतीकरण में कहा था कि भारत सरकार ने बजट में मत्स्य पालन को प्राथमिकता दी है, जिसका ध्यान रखा जाएगा। मछली के उत्पादन दोगुना करने के उपलब्ध में मुख्यमंत्री महासंघ के अफसरों की प्रशंसा भी की।
फैक्ट फाइल
वर्ष मछली उत्पादन (टन)
2017-18 143419
2018-19 173188
2019-20 200656
2020-21 248851
2021-22 293008
2022-23 299165
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