एकात्म धाम आचार्य शंकराचार्य की शिक्षाओं को जीवित रखेगा : चौहान

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अनोखा तीर, खंडवा। हजारों साल पहले जब पश्चिम देशों में सभ्यता के सूर्य का उदय भी नहीं हुआ था जब हमारे देश में वेद ऋचाएं रच दी गई थी। हमारे देश की जो सभ्यता है वह हजारों साल पुरानी सभ्यता है। हमारा उद्देश्य वसुधैव कुटुम्बकम् का रहा है। हमारा बच्चा-बच्चा नारा लगाता है, धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो। हम सारे विश्व के कल्याण की बात करते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है पूरी पृथ्वी हमारा परिवार है। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा हम सौभाग्यशाली हैं कि ऐसी उच्च स्थिति के स्वामी एकात्म-धाम पर अपनी विशेषज्ञता की पेशकश करने के लिए पहुंचे हैं। असामान्य परिस्थितियों में हमें अपने भीतर उपस्थित दिव्य शक्ति को पहचान कर केंद्रित और एकजुट होने की आवश्यकता है। हमें उम्मीद है कि एकात्म धाम आचार्य शंकराचार्य की शिक्षाओं को जीवित रखेगा और यह सबसे सम्मानित आध्यात्मिक स्थलों में से एक बन जाएगा। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि ओंकारेश्वर के तीन दिवसीय दौरे पर आए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे सैलानी टापू से पत्नी साधना सिंह के साथ एनएचडीसी गेस्ट हाउस पहुंचे। यहां आडिटोरियम में आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया गया। इस मौके पर आदि गुरु शंकराचार्य की चित्र पर माल्यार्पण और मंगलाचरण उपरांत मुख्यमंत्री ने अतिथियों गुरू माँ आनंदमूर्ति, डॉ. चिन्मय पंडया, स्वामी चिदानंद सरस्वती, कमलेश डी पटेल दाजी, लेखक एवं गीतकार मनोज मुंतशिर का स्वागत कर सम्मान किया। इसके उपरांत आदिगुरु शंकराचार्य पर शॉर्ट फिल्म ए जर्नी फॉर वननेस व वॉकथ्रू (10 मिनट) एकात्म धाम, निर्माण कार्य का प्रस्तुतीकरण (30 मिनट) का दिया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हार्टफुलनेस के आध्यात्मिक मार्गदर्शक, रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष और पद्म भूषण से सम्मानित कमलेश पटेल दाजी के साथ ओंकारेश्वर में एकात्म धाम का दौरा किया। उद्देश्य था आध्यात्मिक गुरुओं के साथ ओंकारेश्वर में एकात्म धाम की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना। मुख्यमंत्री ने 2017 में उक्त परियोजना की घोषणा की थी। इस अवसर पर आनंदमूर्ति गुरु मां, स्वामी चिदानंद सरस्वती और डॉ. चिन्मय पंड्या भी उपस्थित थे। स्थल के दौरे के बाद एकात्म धाम की निर्माण एजेंसी द्वारा प्रस्तुति दी गई। आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों की मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई। चर्चा में बताया गया कि एकात्म धाम का उद्देश्य आचार्य शंकर की विरासत और ज्ञान को सम्मानित करना और जीवित रखना है। साथ ही उनके संदेश का प्रचार करना है जो बिना किसी मतभेद यानी भौगोलिक सीमाओं, धर्म, राष्ट्रीयता, जाति, पंथ और रंग के परे, पूरी दुनिया का मार्गदर्शन कर सकेगा। ओंकारेश्वर को एकात्म धाम की स्थापना के लिए चुना गया था, क्योंकि यह आचार्य शंकर के ज्ञान की जन्मभूमि है। मध्यप्रदेश सरकार ने एक पंजीकृत ट्रस्ट आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास की स्थापना की थी, जो अद्वैत वेदांत के प्रचार के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सार को पुनर्जीवित और पोषित करने के लिए समर्पित है। मुख्यमंत्री चौहान इसके पीठासीन अध्यक्ष हैं। न्यास यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करता है कि आचार्य शंकर का ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों को समृद्ध और प्रेरित करता रहे। कमलेश पटेल दाजी ने कहा, आचार्य शंकर की महानता मानवता को एक साथ लाने में है। मुख्यमंत्री ने एकात्म धाम के निर्माण के लिए न्यास की स्थापना की परियोजना को बहुत रुचि के साथ हाथ में लिया है। मैं इस परियोजना का हिस्सा बनकर आनंदित हूं और इस जगह को एक ऐसा केंद्र बनाने के लिए अपने विचारों को साझा करने में खुशी हो रही है, जो केवल दिव्य ऊर्जा को आश्रय देने वाला और मानव चेतना का उत्थान करने वाला है। विदित हो कि ओंकारेश्वर में ओंकार पर्वत पर आदिगुरु शंकराचार्य की 108 फीट की प्रतिमा सितंबर तक स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओमकारेश्वर में न केवल आदि गुरु शंकराचार्य का स्मारक बनाया जाएगा बल्कि दुनिया को एकजुट करने के लिए उनके जीवन दर्शन और अद्वैत सिद्धांतों के लिए शिक्षा केंद्र और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन संस्थान बनाया जाएगा। पूरे ओम्कारेश्वर क्षेत्र में वन विहार, नौका विहार और लेजर के माध्यम से भारतीय धर्म संस्कृति और शिक्षा को दर्शाने वाले चित्रण प्रस्तुत किए जाएंगे जो कि नौका विहार से लोगों को आनंदित करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी विवाह वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एनएचडीसी के गार्डन में प्रात: काल पत्नी साधना सिंह एवं साधु संतों की उपस्थिति में पर्यावरण की रक्षा व जनजागृति के लिए वट के पौधे का रोपण भी किया। दोपहर में भोजन और विश्राम के पश्चात शाम 6.30 बजे मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्नी साधना सिंह के साथ माँ नर्मदा की पूजा अर्चना व आरती की। इसके पश्चात भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना कर प्रदेश की सुख शांति समृद्धि और खुशहाली के लिए हवन भी किया।

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