देवास : कैलादेवी प्रांगण में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पं. महेश गुरु जी उज्जैन ने कहा कि नारद जी नारायण के भक्त होते हुए भी अभिमान ग्रस्त होने से नारी के भक्त हो गए। विवाह करने के लिए भगवान से भगवान का रूप ही मांगने लगे तो भगवान ने उनको बंदर का मुंह दे दिया। यह बताया कि जो काम से पीडि़त हो जाते हैं वह नर ही नहीं रहते नारायण के तो हो ही कैसे सकते हैं। उनकी स्थिति वानर जैसी हो जाती है और भगवान ने विश्व मोहनी के साथ विवाह कर लिया और जगत को यह बता दिया कि विश्व मोहनी मैंने मेरी माया है। यह किसी का वर्णन नहीं करती है। यह सिर्फ मेरी है, मेरी ही, मेरी ही रहेगी। इसलिए कभी भी माया कि प्राप्ति को लक्ष्य करके माया कामा की तरह सदुपयोग करते हुए परमात्मा को पाने का ही प्रयास करना चाहिए। ब्रह्मा और विष्णु को भी भगवान शिव ने ही शक्ति संपन्न बनाया। ब्रह्मा को सरस्वती और विष्णु को लक्ष्मी प्रदान की। जिससे यह दोनों ब्रह्मा सृष्टि का कार्य विष्णु पालन का कार्य करते हैं। भगवान शिव ने स्वयं सती पार्वती के साथ ब्याह किया और संघार का कार्य अपने हाथ में लिया। गोपाल ठाकुर ने बताया गुरूवार की कथा में भगवान श्री शिव पार्वती विवाह उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया। मुख्य यजमान अंकिता सचिन व्यास ने कन्यापूजन किया। मुख्य अतिथि देवास विकास प्राधिकरण अध्यक्ष राजेश यादव थे। श्री यादव ने अपने मित्रमण्डी के साथ व्यासपीठ की आरती की। कथा प्रतिदिन 4 से शाम 7 बजे तक चलेगी।
ब्रह्मा और विष्णु को भी भगवान शिव ने ही शक्ति संपन्न बनाया

Text Size:
244 Views
What do you think?






