शहर की दो नदियां ! एक कल-कल बह रही तो दूसरी बदहाल

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सालों पुरानी समस्या जस की तस…..

जिला मुख्यालय पर बहने वाली मटकुल नदी की हालत बद से बदतर हो चली है। जिसका अजनाल नदी पर विपरित असर पड़ रहा है। कई सालों से व्याप्त इस ज्वलंत समस्या का अब तब कोई समाधान नही खोजा जा सका है। परिणामस्वरूप कल-कल बहने के बजाय ये नदियां डे्रनेज वॉटर तथा कूड़े-करकट व प्लास्टिक की पॉलीथिन से ओतप्रोत हैं। यही कारण है कि नदियां अपना मूल स्वरूप खोने लगी हैं। नदियों की यह दुर्दशा उनके सरंक्षण व संवर्धन के तमाम प्रयासों को खोखला साबित करती है।  

 बिरजाखेड़ी स्थित अजनाल का दृश्य

मानपुरा स्थित मटकुल नदी का हाल

अनोखा तीर, हरदा। मानव सभ्यता के लिए नदियों को वरदान माना गया है। क्योंकि यदि धरती पर नदियां नहीं होती तो जीवन संकटमय होता। भारत में प्राचीनकाल से ही नदियों का सम्मान शीर्ष पर रहा है। बड़ी तथा क्षेत्रीय नदियां पूज्यनीय होने के साथ-साथ वहां के लोगों की आस्था का केन्द्र मानी जाती हैं। इसका मुख्य कारण नदियां केवल जल मार्ग ही नहीं हैं बल्कि बारिश के पानी को सहेजकर भू-जलस्तर बनाए रखती हैं। जो खासकर सिंचाईं तथा पेयजल व्यवस्था में सहायक होता है। ऐसे में गांव, कस्वा व शहरी सीमा तथा शहर के नजदीक से बहने वाली नदियों का संरक्षण व संवर्धन हम सबकी सामूहिक जबावदेही है। इस दिशा में सार्थक एवं ठोस प्रयासों की दरकार है। इन सब बातों के बीच जिला मुख्यालय पर बहने वाली मटकुल नदी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जिसका असर जत्रापड़ाव स्थित मटकुल व अजनाल नदी के संगम स्थल पर दिखेगा। वहीं चार-आठ कदम पीछे यानि मानपुरा स्थित नदी के रपटे पर सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। नदी की दुर्दशा का ये दृश्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, वार्ड प्रतिनिधि समेत जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की सक्रियता तथा स्वच्छता को लेकर उनकी तत्परता को दर्शाता है। यह केवल वर्तमान जनप्रतिनिधियों की अनदेखी नही बल्कि उन तमाम लोगों की लापरवाही कहला रही है, जो बड़े-बड़े वादे करके चुनावी समर में अपना स्वार्थ साध चुके हैं। उन्होंनें ना केवल जिला मुख्यालय की इस ज्वलंत समस्या को नजरअंदाज किया, बल्कि शहरवासियों को गंदगी और बीमारी के कारणों से घेरे रखा है।

शहरी सीमा में स्थिति ज्यादा खराब

मुख्यालय पर बहने वाली दोनों नदियां पहाड़ी हैं, जो कई गांवों से होकर यहां पहुंची हैं। शहर के करबला घट पर मटकुल और अजनाल नदी का संगम हुआ है। यहां से दोनों नदी एक होकर आगे करीब 25 से 30 किलोमीटर नर्मदा के बैक वॉटर में जाकर मिलती हैं। दोनों नदियों के छोटे से सफर दौरान आबादी क्षेत्र के आसपास उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा है। अजनाल नदी रहटगांव और हरदा बाजार क्षेत्र से सटकर बहती है। जबकि मटकुल शहरी सीमा में प्रवेश करते ही डबल फाटक एरिया, रेलवे पुल तथा कुलहरदा होते हुए मानपुरा में अजनाल नदी में मिलती है।

कई जगहों पर मिल रहा गंदा पानी  

बताना होगा कि शहर का ड्रेनेज अलग-अलग जगहों पर इन नदियों में मिलता है। जिस वजह से सर्वाधिक प्रदूषण मटकुल में दिखाई देगा। जिसके चलते नदियों की सूरत बदल गई है। डे्रनेज के कारण नदी के पानी का रंग कहीं काला तो कहीं हरा दिखाई पड़ता है। यही कारण है कि शिक्षित व जागरूक नागरिक प्रदूषित नदियों से दूरी बनाना बेहतर समझते हैं। इसके अलावा शहर का एक ड्रेनेज खेड़ीपुरा स्थित रपटे के पास गिरता है, जो मुख्य मार्ग से साफ देखा जा सकता है। इस संबंध में नागरिकों का कहना है कि नदियों को प्रदूषण मुक्त करने ठोस कदम उठाने की जरूरत है, तभी सार्थक परिणाम दिखाई देंगे।

यह जरूरी….

– नदियों में डे्रनेज गिरना बंद हो

– आसपास कचरा फेंकने पर सख्ती

– जगह चिन्हित होने पर फेंसिंग का विचार

– खुले में शौच के विरूद्ध जन-जागरूकता

– जनसहयोग से वृक्षारोपण एवं साफ-सफाई

– जागरूक युवाओं के जिम्मे सुरक्षा व निगरानी

 

प्रस्ताव भेजा है, जल्द मिलेगी निजात

शहर के सभी नालों को एक करने का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव अनुसार नालों को एक करके मुक्तिधाम के आगे छोड़ा जाएगा। आगे चलकर वहां सुरक्षित जगह पर फिल्टर प्लांट की स्थापना तथा पानी को साफ करके नदी में छोड़ने की कार्ययोजना पर काम करेंगे, ताकि शहरी नदियां पूरी तरह साफ हो सकें। इससे नदी व जल दोनों का संरक्षण होगा। इस दिशा में प्रयासों को गति देंगे।

भारती राजू कमेड़िया

नगर पालिका अध्यक्ष

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