घटते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता- 400 फिट दूर पहुंची नर्मदा की जल धारा, बीच नर्मदा में पहुंचकर करना पड़ रहा श्रृद्धालुओं को स्नान

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नसरुल्लागंज। क्षेत्र की जीवन दायिनी माँ नर्मदा का जल स्तर लगातार घट रहा है। वर्तमान में हालात यह हैं कि घाट से 100 मीटर दूर तक केवल पत्थर नजर आ रहे है। इसके चलतें श्रृद्धालुओं को स्नान करने व डुबकी लगाने में भी परेशानी हो रही है। एक ओर तापमान का प्रभाव निरंतर बढ़ रहा है ओर दूसरी ओर नर्मदा का पानी लगातार कम हो रहा है। नर्मदा के ऊपरी क्षेत्र में बने बांधों से पानी नहीं छोडऩे से पिछले कई दिनों से ऐसे हालात बने हुए है। नीलकंठ व छिपानेर नर्मदा तट के पेड़ी घाट से जलस्तर काफी नीचे उतर गया है। यहां नाव घाट तक पहले ही नाविको को असुविधा हो रही है। सबसे ज्यादा परेशानी यहां रोजाना स्नान करने वाले श्रृद्धालुओं की बनी हुई है। नीलकंठ निवासी सुरेश केवट व अमर सिंह ने कहा कि घटते जलस्तर की वजह से नर्मदा परिक्रमावासियों को स्नान करने दूर तक पत्थरों से गिरते – पड़ते जाना पड़ रहा है। नीलकंठ नर्मदा में लगभग एक दर्जन से अधिक स्थानों पर टापू दिखाई देने लगे है। मुर्दा घाट के हालात यह हैं कि यहां लगभग 600 फिट दूर पानी पहुंच चुका है, जिससे शोक संतृप्त परिवारों को शव दाह देने में परेशानी हो रही हैं। पत्थर निकल आने से श्रृद्धालु ठीक ढंग से स्नान भी नहीं कर पा रहे है। ऐसा दृश्य इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला। लगातार गिरते जलस्तर का नतीजा यह देखने को मिल रहा हैं कि कई श्रृद्धालु नर्मदा को पैदल ही पार करने की सोच रहे है। श्रृद्धालुओं को डूबकी लगाने के लिए बीच नर्मदा में पहुंचना पड़ रहा है। नर्मदा नदी में लगभग 400 फिट तक पहुंचने के बाद भी श्रृद्धालु आधे भी नहीं डूब पा रहे है। किनारे बसे केवटों द्वारा टापूओं पर तरबूज व ककड़ी की खेती शुरु कर दी है।

जलस्तर गिरने से पेयजल संकट गहराया
अल्पवर्षा व लगातार जायद फसल मूंग में सिंचाई करने के लिए नर्मदा में हजारों की संख्या में मोटरे किनारे बसे किसानों ने लगा रखी है। इसके अलावा दर्जनों पेयजल योजनाओं का संचालन भी नर्मदा से हो रहा है। इसके अलावा नर्मदा नदी से लगातार रेत का दोहन होना भी प्रमुख वजह माना जा रहा है। नर्मदा के जलस्तर गिरने का असर नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में भी साफ देखा जा सकता है। पेयजल स्त्रोतों का जलस्तर भी 150 से 200 फिट नीचे जा पहुंचा है, जिससे बोरो ने पानी देना बंद कर दिया है। वहीं किसानों के खेतो में भी मूंग में सिंचाई का संकट पैदा हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को भी पीने का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।

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