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Tuesday, 13 October 2026
हरदा

लगातार हार जीत सीटों पर ध्यान : नेता नहीं कार्यकर्ता होंगे प्रमुख  

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प्रदीप शर्मा, हरदा। प्रदेश में इस साल के अंतिम महीनों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में खासी बेचैनी है। इस वर्ष होने वाले इन चुनावों को लेकर सभी पार्टियों ने आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। इसलिए कोई भी दल एक भी सीट किसी हाल में खाली रखने को तैयार नहीं है। दोनों दलों की आलाकमान नहीं चाहती कि इस बार मामूली अंतर से जीत-हार का फैसला हो जाए। बताना जरूरी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में इन दलों कों बहुत कम मतों से मिली हारजीत के कारण प्रदेश की राजनीति का समीकरण बुरी तरह गड़बड़ा गया था। सो इस बार कोई भी दल कहीं भी कमी छोड़ने को तैयार नहीं है।

इन सीटों पर होगा खास ध्यान

गत विधानसभा चुनावों के परिणामों से एक बात साफ हो चुकी है कि अब प्रदेश की राजनीति में किसी नेता विशेष का चेहरा दिखाकर किला फतह नहीं कर सकते। इस कारण कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टी लगातार जमीनी जमावट करने में जुटी हुई हैं। इसके लिए संगठन में जरूरी बदलाव भी कर रहीं हैं।

लगातार हार और कम अंतर पर नजर

आगामी समय होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस तमाम दांव पेंच आजमाने में पीछे नहीं रहना चाहती। एक तरफ जहां उसकी नजर पार्टियों के वजनदार असंतुष्ट नेताओं पर है तो वहीं अपने ऐसे नेताओं को सक्रिय करने पर है। इस कारण विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का ध्यान उन 66 सीटों पर है जहां मामूली अंतर से फैसले हुए हैं। यही राज्य में एक बार फिर से उनके दौरे बढ़ गए हैं। इसमें विगत दिनों रहटगांव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सिराली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के दौरे को याद किया जा सकता है। यही वजह है कि टिमरनी सहित 66 सीटों पर कांग्रेस विशेष ध्यान दे रही है। इन सीटों पर बूथवार काम करने और योग्य उम्मीदवार लाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यहां पार्टी के 16 प्रमुख नेताओं को राज्य के अलग-अलग इलाकों की जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं। यही वजह है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में न तो पार्टी के किसी नेतख का चेहरा चलेगा और न ही किसी की हुकूमत हावी होगी। बस जहां कार्यकर्ताओं ने मिलकर काम कर लिया वह दल की जीत सुनिश्चित है।

घोषणा पत्र बनाने पर फोकस

अब राजनीतिक पार्टियों का ध्यान मैदान में कार्य करने के साथ अपने घोषणापत्र पर भी खास हो गया है। नईदिल्ली के चुनाव में आप पार्टी के इस हुनर का इस्तेमाल अब हर राज्य में बिना झिझक होगा। इसीलिए कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टी स्थानीय मुद्दों की पहचान कर घोषणा पत्र तैयार करेगी। वर्तमान विधायक के प्रति नाराजगी या जनप्रियता का मूल्यांकन कर भी आसपास का माहौल बनाया जाएगा। हारी हुई सीटों पर जाति समीकरण के हिसाब से उम्मीदवार चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं अपने कांग्रेस सवा साल के कार्यकाल को भुनाने पर फोकस कर रही है। इस प्रकार विपक्ष के सामने पूरा मैदान साफ है कि कहां कैसे किस पर वार करना है। देखना है कि किसकी चाणक्य नीति इस बार रंग लेकर आती है।

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