पर्यावरण व जल संरक्षण के अलावा अधोसंरचना में मजदूरों का अहम योगदान
खरगोन 30 अप्रैल 23/आज मजदूर दिवस है, जो अपनी मेहनत के बल पर किसी भी असंभव कार्य को सम्भव बनाने का माद्दा रखता है। मशीनीकरण दौर में भी श्रम की उतनी ही आवश्यकता रही जो आज कंप्यूटरीकृत युग में है। श्रमिकों ने ही महेश्वर का प्रसिद्ध किला बनाया तो दूसरी तरफ खरगोन शहर को पेयजल की पूर्ति करने वाला देजला देवाड़ा डेम निर्मित किया। 40 वर्षाे बाद आज भी उनकी मेहनत का सार्थक परिणाम शहर के निवासियों की नस-नस में समाहित है। हमारे आसपास ऐसे सैकड़ो कार्य है जो मजदूरों की ही देन है। चाहे जिला मुख्यालय का उत्कृष्ठ विद्यालय हो मोरटक्का और बड़वाह का पुल हो या नवीन कलेक्टर भवन हो मजदूरों के श्रम के बगैर कुछ भी नहीं। जल संरचना के लिए पिछले वर्ष 67 अमृत सरोवरों को भी पूरा करने में हजारों मजदूरों ने अपना पसीना बहाया है। आज ये अमृत सरोवर कृषि और पशुओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए है।
मनरेगा से मजदूरों को मिला रोजगार और हमें पर्यावरण व जल संरक्षण
आज भारत शासन और मप्र शासन के सहयोग से देश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना संचालित हो रही है। इसके माध्यम से गत वर्ष 1.34 लाख परिवारों के 2.48 लाख सदस्यों को 71.22 लाख मानव दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया गया, जिसमें लगभग 147.95 करोड़ रुपये का भुगतान मजदूरों के खातों में किया गया। जिले में मनरेगा योजना अंतर्गत महिलाओं को 45 प्रतिशत रोजगार उपलब्ध कराया गया है। यहां लगभग 30,769 कार्य को पूर्ण किये गए है। मनरेगा मजदूरों को शत प्रतिशत आधार लिंक भुगतान कराने के लिए लगभग 96 प्रतिशत मजदूरों के आधार खाता लिंक कराए गए हैं। आगामी 1 माह में 100 प्रतिशत आधार लिंक करा कर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है।
कृषि के विकास में मनरेगा का अहम योगदान
मनरेगा मूलतः अकुशल श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है परंतु इससे कृषि क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है। मनरेगा योजना में एक्ट के प्रावधानों अनुसार 60 प्रतिशत कृषि एवं कृषि से संबंधित क्षेत्र में किया जाता है। इसके विरुद्ध जिला में 88 प्रतिशत कृषि एवं इससे संबंधित कार्य में किया गया है किसानों को कपिलधारा, नंदन फलोद्यान, मेड बंधन, जल संरक्षण खेत तालाब स्टॉप डेम चेक डैम के माध्यम से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया गया है।
पर्यावरण संरक्षण में मनरेगा का महत्वपूर्ण योगदान
मनरेगा एक्ट के प्रावधान अनुसार प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट में 65 प्रतिशत में किया जाना है। जिले में पिछले वर्ष लगभग 74 प्रतिशत में किया गया है। पर्यावरण विकास के लिए जल संरक्षण का कार्य वृहद स्तर पर किया जा रहा है। जिला में लगभग 151 अमृत सरोवरों के अलावा लगभग 7000 अन्य जल संरक्षण संरचनाएं बनाए जाने का कार्य पूर्णता की ओर है। इसके साथ-साथ जिले में प्रतिवर्ष पौधरोपण जिसमें नंदन फलोद्यान मियावाकी व सामुदायिक वृक्षारोपण भूमिका है किए जा रहे हैं। मनरेगा मजदूरों को रोजगार देने के साथ-साथ पर्यावरण विकास एवं कृषि क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। इसी के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के सुधार हेतु आवागमन के सुधार 400 सड़कों का निर्माण, 200 से अधिक पुल पुलिया का निर्माण मनरेगा योजना के माध्यम से किया गया है।
ग्रामीण विकास में बहुत कुछ मजदूरों की देन
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती ज्योति शर्मा ने मजदूर दिवस पर कहा कि जिले में ग्रामीण विकास में बहुत कुछ मजदूरों की देन है। वर्तमान में मनरेगा श्रमिकों को 221 मजदूरी प्रदाय की जा रही है। इस वर्ष जिले में जल संरक्षण और ग्रामीण स्वच्छ्ता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मनरेगा के तहत मजदूरों को समय पर 100 प्रतिशत भुगतान की व्यवस्था की जाएगी।
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