जब जब धरा पर, असुरों का अत्याचार हुआ।
गो ब्राह्मण संतो के हित, परमात्मा नया अवतार लिया है।
वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया को, भगवान परशुराम ने अवतार लिया है।
पिता श्री जमदग्नि मुनि, रेणुका जिनकी माता है।।
भगवान शिव जी की आराधना से, दिव्य परशु को पाया है।
आमोघ परशु को धारण करने से, महादेव ने परशुराम नाम धराया है।।
एक बार राजा सहस्त्रार्जुन का, जमदग्नि के आश्रम में आना हुआ।
कामधेनु के प्रताप से,
राजा का खूब आदर सत्कार हुआ।।
राजा ने मुनि से कामधेनु छीनकर,
अपनी माहिष्मतीपुरी को ले गया।
परशुराम ने क्रोध में आकर,
फरसे से सहस्त्रार्जुन का संहार किया।।
कामधेनु को वापस लाकर,
अपने पिता को सौंप दिया।
एक समय नदी तट पर,
ऋषि पत्नी जल भरने को आई।।
जल क्रीड़ा करते गंधर्व राज को देखकर,
मन चित्ररथ की और चला गया।
मुनि ने पत्नी का मानसिक पाप देखकर,
पुत्रों को माता के वध करने का आदेश दिया।।
परशुराम ने आज्ञा पाकर,
भाइयों सहित माता का वध कर डाला।
प्रसन्न पिता से वर पाकर,
भाइयों सहित माता को जीवित कर डाला।।
एक बार परशुराम भाइयों को लेकर,
आश्रम से वन में दूर निकल गए।
सहस्त्रार्जुन पुत्रों ने मौका पाकर,
ध्यानरत मुनि का मस्तक काट दिया।।
माता का करूण कंदन सुनकर,
परशुराम शीघ्रता से आश्रम को आए।
पिता का मस्तक कटा देखकर,
परशुराम के अंतर में क्रोधाग्नि धधक गयी।।
माहिष्मती पुरी में राज पुत्रों का संहारकर,
अपने पिता का दाह संस्कार किया।
पिता के बध को निमित्त बनाकर,
इक्कीस बार पृथ्वी पर दुष्टों का संहार किया।।
समस्त वसुंधरा कश्यप मुनि को दान कर,
महेंद्र पर्वत पर चले गये।
गंधर्व देवता मुनियों ने,
भृगु नंदन का सम्मान किया।।
परम पराक्रमी, परम पितृ भक्त,
भगवान परशुराम के चरित्र का पुराणों में वर्णन है।
परम तेजस्वी परम पुरुष,
भगवान परशुराम को बारंबार प्रणाम है।।
*रचियता*
*पं. कमलेश कुमार भट्ट*
*(भट्ट गुरुजी)*
*ग्राम – सेमरी हरचंद*
*जिला होशंगाबाद नर्मदापुरम (म.प्र)*
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