अनोखा तीर, हरदा। जीवन भर दूसरे के यहां गोबर पूंजा करते हुए मालकिन द्वारा दी गई फटी साड़ी में थेगड़ा लगाकर अपना जीवन बसर करने वाली धापू माय के लिए हवाईजहाज तो दूर कार में बैठना भी किसी सपने से कम नहीं हैं। गरीबी में पैदा हुई और गरीबी का ही जीवन यापन करते हुए धापू माय के लिए कभी कभार शहर तक आना भी किसी तीर्थ जाने से कम नहीं था। हां चुनाव के समय आसपास के किसी बड़े गांव में किसी बड़े नेताजी की आमसभा हो और वह हेलीकॉप्टर से आये हों तो वह जरुर देखने जाया करती थी। लेकिन हवाईजहाज को तो गर्मी के दिनों में घर की बाखल में खटिया पर लेटे हुए आसमान में काफी ऊपर उड़ते हुए देख लेना भर ही काफी था। सही पूछो तो यह भी नहीं मालूम कि हवाईजहाज होता कैसे और कितना बड़ा होता है। धापू माय को पता था कि वह हवाईजहाज में तो दूर कभी जीप कार में भी नहीं बैठ सकती है। उसके लिए तो कभी कभार नर्मदा स्नान करना ही किसी तीर्थ यात्रा से कमतर नहीं था। बुढ़ापे का शरीर और आर्थिक तंगी दोनों उसके लिए मुख्य बाधक बने हुए थे। लेकिन अब धापू माय तीर्थ यात्रा पर भी जाएगी और हवाईजहाज में भी बैठेंगी। उसका अनदेखा सपना साकार होने जा रहा है। यह सब संभव हो रहा है गरीबों और बुजुर्गो की लाचारी को भलीभांति समझने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की नवाचार योजना के चलते। गांव से हवाई अड्डे तक लाने ले जाने और फिर हवाईजहाज से तीर्थ यात्रा कराने का काम शिवराज सरकार द्वारा किया जा रहा है। ऐसा मध्यप्रदेश ही नहीं देश के इतिहास में पहली बार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री की यह अभिनव पहल धापू माय जैसी पूरे प्रदेश की रुखड़ई, दगड़ई, पारू, मंगल, दशरथ, गोटया जैसे हजारों गरीब ग्रामीणों के लिए तो वरदान साबित होगी। जिन्होंने कभी हवाईजहाज में बैठना तो दूर देखा तक नहीं था। यह भला शिवराज सिंह को कैसे भूल सकते हैं जिसके कारण आज वह अपने मानव जीवन को धन्य महसूस कर रहे हैं। बल्कि उसके लिए तो यह हवाई तीर्थ यात्रा ऐसे हैं जैसे स्वयं ईश्वर ने विमान भेजकर अपने सुदामा और सबरी को अपने धाम बुलाया हो। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना ने तो शिवराज सिंह चौहान को श्रवण कुमार की संज्ञा पहले ही दिला दी थी, लेकिन अब इस योजना से तो वह गरीबों और बुजुर्गो के लिए साक्षात ईश्वरीय अवतार हो जाएं तो अतिश्योक्ति नहीं है। बेसक इस चुनावी साल में जहां लाड़ली बहना योजना शिवराज सरकार को घर-घर पहुंचाने का कार्य कर रही है तो वहीं हवाईजहाज से तीर्थ दर्शन योजना दुआओं के साथ दवा भी साबित होगी। गरीबी और महंगाई के दंश से अगर कोई गरीब सरकार से खफा भी होगा तो लाड़ली बहना और धापू माय जैसी तीर्थ यात्री उसको नजरअंदाज करते हुए शिवराज की ही माला जपती नजर आएंगी। जो तीर्थ यात्रा से लौटते समय शायद कुछ इस तरह अपने उद्गार व्यक्त करते नजर आए कि-
जय जय शिव शंकर
पैसा लगे ना पत्तर
हमने दर्शन तेरे नाम से किया
डट जायेंगे, अड़ जाएंगे
हमने तो सब कुछ तेरे नाम कर दिया, जय जय….!
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