Skip to content
Thursday, 22 October 2026
भोपाल मध्य प्रदेश

मैसूर से प्रधानमंत्री मोदी रविवार को करेंगे बाघ गणना के रिजल्ट घोषित

3 min read
Anokhateer editorial default
Text Size:

 

गणेश पांडे, भोपाल। प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मैसूर में एक मेगा इवेंट में नवीनतम बाघ जनगणना के आंकड़े जारी करेंगे। वह अमृत काल के दौरान बाघ संरक्षण के लिए सरकार का विजन भी जारी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी टाइगर प्रोजेक्ट के 50 वर्ष पूरे होने पर एक स्मारक सिक्का भी जारी करेंगे। कर्नाटक के मैसूर में रविवार को बाघ गणना के घोषित होने वाले बाघ गणना के रिजल्ट में मप्र को एक बार फिर टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने की संभावना प्रबल है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी जेएस चौहान के मुताबिक इस बार की गणना में पिछली बार से ज्यादा वन बीटों में बाघ दिखाई दिए हैं। प्रदेश में बाघों की बेहतर संख्या होने का अनुमान है। इसी आधार पर चौहान को पूरी उम्मीद है कि टाइगर स्टेट का दर्जा बरकरार रहेगा। वन्य प्राणी विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि रविवार को घोषित होने वाले रिजल्ट में एमपी में बाघों की संख्या 526 से बढ़कर 700 के आसपास होने की संभावना है। कान्हा में बाघों की संख्या 120 से ऊपर बताई जा रही है।

2018 की गणना के आंकड़े

मध्य प्रदेश 526, कर्नाटक 524, उत्तराखंड 442, महाराष्ट्र 312, तमिलनाडु 264, केरल और असम 190-190, उत्तर प्रदेश 173, राजस्थान 91, बंगाल 88, आंध्र प्रदेश 48, अरुणाचल प्रदेश 29, बिहार 31, ओडिशा 28, छत्तीसगढ़ 19, गोवा 3 तथा झारखंड में 5 बाघ पाए गए थे, कुल 2967 बाघ भारत में पाए गए थे। मध्यप्रदेश में इस बार पहले से ज्यादा बीट में बाघ देखे गए है। 2014 की गणना में 714 बीट में 308 टाइगर देखे गए थे। 2018 में 1432 बीट में 526 टाइगर मिले थे। 2022 की गणना में दो हजार से ज्यादा बीट में बाघ देखे जाने की जानकारी मिली है। जिससे अनुमान है कि बाघ की संख्या बेतहाशा बढ़ी है।

इन पद्धतियों से की गई बाघों की गणना

कैमरा ट्रैपिंग: इसमें अलग-अलग बाघों की छवियों को कैप्चर करने के लिए बाघों के आवासों में रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप स्थापित करना शामिल है। इन छवियों का उपयोग तब अलग-अलग बाघों की पहचान करने के लिए किया जाता है, जो उनके शरीर पर बने धारी पैटर्न के आधार पर होते हैं, जो मानव फिंगरप्रिंट के समान होते हैं।

डीएनए विश्लेषण : डीएनए विश्लेषण के माध्यम से बाघों से एकत्र किए गए बालों या स्कैट के नमूनों का उपयोग बाघों की प्रजातियों, लिंग और व्यक्तिगत पहचान को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है। यह विधि दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्रों में बाघों की आबादी का अनुमान लगाने के लिए उपयोगी है।

पग मार्क काउंटिंग : इसमें मौजूद व्यक्तियों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए किसी विशेष क्षेत्र में बाघों के पग मार्क पैरों के निशान की गिनती करना शामिल है। इस पद्धति का उपयोग परिणामों को मान्य करने और बाघों की आबादी का अधिक सटीक अनुमान प्रदान करने के लिए अन्य विधियों के संयोजन में किया जाता है।

प्रत्यक्ष अवलोकन : इसमें प्रशिक्षित पर्यवेक्षकों द्वारा जंगल में बाघों का प्रत्यक्ष अवलोकन शामिल है। इस पद्धति का उपयोग अन्य विधियों के पूरक और बाघों के वितरण और व्यवहार पर अतिरिक्त जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाता है।

106 Views
What do you think?

Leave a Reply