
*आठनेर मुकेश सोनी*
प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी शीतला माता के भक्तों ने 5 दिन से भगत बनके नगर का परिक्रमा लगाकर घर-घर जाकर माता रानी के लिए जोगवा मांग कर नगर की सुख शांति एवं समृद्धि के लिए सभी नगर वासियों की जोगवा के रूप में मांगी गई भिक्षा माता के चरणों में अर्पित कर माता से पूरे नगर को सुख शांति एवं समृद्धि से भरपूर रखे ऐसी कामना के साथ आज सभी माता के भक्तों ने नाडे गाड़े खींचकर अपनी मन्नत को पूरा किया वही सभी भक्तों ने बाजार चौक में माता के जय कारों के साथ नाच गाकर माता से सभी को अच्छा रखने की मन्नत की
महिलाओं ने नीम पहनकर अपनी मन्नते पूरी की

नगर सहित आसपास के ग्रामों से महामाई के दरबार में सभी महिलाओं ने अपनी मन्नत के हिसाब से नीम पहनकर नीम की पूजा कर माता रानी को निम अर्पित की इस संबंध में बताते हैं कि जो माता बहन हमेशा बीमार रहती है वह माता के दरबार में जाकर मन्नत कर बोलती है कि मुझे अच्छा कर दीजिए मैं निम पहनूंगी और माता उसे अच्छा कर देती है और वह नीम की अपनी मन्नत को चैत्र पूर्णिमा पर माता के दरबार में जाकर पूरी करती है
माता रानी के दरबार में जली जोत
नगर के बाजार चौक स्थित मामा के दरबार में सभी नगर वासी अपने-अपने घरों से तेल लाकर माता रानी के दरबार में लगी जोत में डालकर अपनी हर समस्याओं को इस तेल के माध्यम से इस ज्योत में डालकर जलाते हैं ऐसी मान्यता है कि हर परिवार से इस ज्योत में मीठा तेल लाकर डाला जाता है जिससे नगरवासी हर समस्या से निजात पा लेता है इसी मान्यता को आज भी नगरवासी बखूबी निभाते हैं और यह कार्य प्रतिवर्ष चलता है इस संबंध में नगर के वामन राव जी घोरसे ने बताया कि यह परंपरा पुरानी है हमारे दादा परदादा सारे लोग यह परंपरा को निभाते थे आज आठनेर शहर बहुत बड़ा नगर हो गया है परंतु माता रानी के पूजा पाठ में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आई है बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी मन्नतें माता के चरणों में समर्पित कर पूरी कर रहे हैं और उन्हें इसका लाभ भी होता है इसका कारण यह है कि आज माता के चरणों में पूरा नगर नतमस्तक है
माता के दरबार में सभी एक समान है वामन रावघोरसे
नागदेव मंदिर के संस्थापक पंडित वामन राव बाबा ने बताया कि माता महारानी की असीम कृपा सभी पर बनी रहती है वह हिंदू मुसलमान सिख ईसाई कुछ नहीं देखती माता जब आती है वह बच्चे बड़े किसी को नहीं देखती श्री वामन बाबा ने बताया कि रामायण में इसका वर्णन है जब लंका पर चढ़ाई भगवान राम ने की थी तब माता महारानी का उन्होंने आव्हान किया था तब माता रानी प्रसन्न होकर भगवान राम को मात्र 5 दाने माता के आए थे भगवान राम हाथ जोड़कर माता महारानी के समक्ष खड़े होकर कहां मां मुझसे आपका यह रूप सहन नहीं हो पा रहा है आप इसे अपने पास बुला ले माता का नाम जब बच्चों को रखा जाता है बड़ों को रखा जाता है माता किसे भी आती है जाति धर्म नहीं देखती श्री घोरसे बाबा ने बताया कि जब मुसलमान समाज में माता का नाम रखा जाता है तो हिंदू धर्म आवली के लोग उनके द्वार जाकर उनसे विधि विधान से पूजा अर्चना करवा कर और माता की सेवा हिंदू धर्म के लोग देते हैं परंतु मुसलमान भाई भी माता महारानी के इस आगमन से यह भी हिंदू भाइयों के सहयोग से माता का पूरा सत्कार अपने अपने घरों में करते हैं वामन राव घोरसे ने बताया कि माता किसी जाति संप्रदाय को नहीं देखती वे जिसके याहआना है उसके यहां आ जाती है इसलिए सभी इस चैत्र पूर्णिमा को बहुत धूमधाम से मनाते हैं एवं माता के चरणों में अपनी मन्नत पूरी करते हैं
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