गणगौर : आज और कल माता की बाड़ी में आएंगे खड़े

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खंडवा। पूरे निमाड़ गणगौर का पर्व बड़े ही धार्मिक उल्लास व धूमधाम से मनाया जाता है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गणगौर माता की अगवानी बड़े धूमधाम से की जाती है। विगत 35 वर्षो से ग्राम बखार में एकादशी पर पंडित अनिल मार्कण्डेय द्वारा मंदिर में बाड़ी बोई जाती है, जिसका पूजन प्रतिदिन सुबह शाम किया जाता है। साथ ही माताएं पाती खेलने भी आती है और रात्रि में गणगौर माता के झालरिया भी गाने आती है। ऐसे ही पूरे शहर और आस पास के ग्रामीण अंचलों में चैत्र गणगौर माता का पर्व पूरे परिवार के साथ धूम धाम से मनाया जाता है।

पं. मार्कण्डेय ने बताया कि गणगौर महा पर्व होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक, 18 दिनों तक चलने वाला त्यौहार है। शहर एवं गांव में कही चैत्र कृष्ण नवमी, दशमी या एकादशी पर माता के मुठ रखते है जिसे खड़े लाना भी कहते है, जिसे विधिवत पवित्रता के साथ बाड़ी में बांस की छोटी छोटी टोकरी में बोए जाते है जिसका प्रतिदिन पूजन होता है। शुक्ल तृतीया को बाड़ी खुलते ही ज्वारे और माता का पूजन किया जाता है। इस बार गणगौर तीज 24 मार्च की रहेगी, इस दिन धनियर राजा और रनुबाई का सुंदर श्रृंगार किया जाता है। अंतिम दिन शहर सहित प्रत्येक गांव में भंडारे का आयोजन होता है तथा माता की विदाई की जाती है। मां शीतला संस्कृत पाठशाला के आचार्य अंकित मार्कण्डेय ने बताया कि गणगौर पूजन में कन्याएँ और महिलाएँ अपने लिए अखण्ड सौभाग्य, अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से प्रतिवर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं। कन्याए अच्छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती है और पूजन करती है। यह त्यौहार गणगौर का महापर्व परिवार को जोड़े रखने का एक दूसरे से मिलकर रहने का संदेश देता है जिससे पूरे परिवार व समाज में प्रेम बना रहे।

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