अनोखा तीर, हरदा। जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु निरंतर पिछले 2६ वर्षों से जैविक खेती अभियान में कार्य कर रहे शिवशक्ति बायो गु्रप द्वारा गांव-गांव जाकर किसान संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत ग्राम कालधड़ में एक किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया। किसान संगोष्ठी में जो किसान भाई अपनी परम्परागत खेती से भटक कर रसायनिक खाद एवं उर्वरक की ओर चले गए है उन्हें जानकारी देकर बताया जा रहा है कि जैविक खेती में ही किसान भाईयों का भविष्य सुरक्षित है। जैविक उर्वरक बायो खाद एवं फर्टीलाईजर जीवाणु कल्चर के नाम से जाने जाते है कृषि प्रधान है तथा कम कीमत में भूमि की संरचना को सुधारते है। जैविक खाद एवं दवाईयों के प्रयोग से भूमि की उर्वरक शक्ति बढ़ती है और किसान मित्र कीटों एवं जीवाणुओं की संख्या बढ़ती है जो कि भूमि के लिए अति आवश्यक है। आज के बढ़ते रासायनिक खाद एवं कीट नाशकों के प्रयोग से भूमि की स्थिति खराब होती जा रही है। रासायनिक खेती का प्रयोग करके फसलों पर तो दुष्प्रभाव पड़ ही रहा है, साथ ही मानव जीवन के लिए भी हानिकारक साबित हो रहा है। रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि के ऊपर एक कठोर परत जम गई है, जिससे इसकी उपजाऊ क्षमता में कमी आ रही है। इस अभियान में निरंतर कार्य कर रहे अधिकारी विकास नागर किसानों को अवगत करा रहे है कि किसान बंधु कम लागत में अधिक पैदावार करके आर्थिक स्थिति तो सुधार ही सकते है, साथ ही भूमि की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाकर अपनी मातृभूमि की रक्षा करके पर्यावरण प्रदूषण से बचा पाएंगे। संगोष्ठी में उपस्थित क्षेत्रीय अधिकारी विजय गहलोद ने बताया कि रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का प्रयोग कर मानव भयंकर बीमारियों जैसे बल्ड प्रेशर, शुगर, कैंसर, हार्ट अटैक आदि की चपेट में आ रहा है। इसलिए हमें अधिक से अधिक जैविक खेती पर ध्यान देना चाहिए। कम्पनी अधिकारी आरजी शर्मा ने बताया कि यदि किसानों ने जैविक खेती को नहीं अपनाया तो कुछ ही समय में सम्पूर्ण जमीन बंजर हो जाएगी तथा जो परिवार कैमिकल से पैदा अनाज, फलो का उपयोग भोजन में कर रहे है वह विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो जाएंगे। जैविक खेती के लिए किसान भाईयों को पशुपालन करना चाहिए, जिससे पशुधन के अवशिष्ट प्रदार्थ जैसे गोबर, गोमूत्र आदि का इस्तेमाल खेती में कृषि उपजाऊ एवं स्वास्थ्यवर्धक बनाने में किया जा सके। संगोष्ठी में उपस्थित सभी किसान भाईयों ने जैविक खेती करने का संकल्प लेते हुए प्रतिवर्ष एक से दो एकड़ रकबा जैविक खेती का प्रतिवर्ष बढ़ाने का वचन दिया।
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