विकास पवार
बड़वाह – शास्त्रों के अनुसार करवा चौथ व्रत कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चन्द्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन किया जाता हैं।यह व्रत सुहागनी महिला पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के उद्देश्य से रखती है । इस दिन महिला सामूहिक रूप से एकत्रित होकर भालचन्द्र गणेश जी की पूजा अर्चना करती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी की तरह महिलाये पूरे दिन निर्जला उपवास रख रात में चन्द्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही भोजन करती है ।कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है ।
पति ने पत्नियों को सदा सुहागन रहने दिया आशीर्वाद—–
गुरुवार को होने वाले करवाचौथ व्रत को लेकर महिलाओ में काफी उत्साह देखा गया ।वही इस व्रत की रात्री पूजा के पश्चात पतियों ने अपनी पत्नियों को उपहार में सोने, चांदी के आभूषण एवं साड़ियां उपहार स्वरूप भेट कर सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद दिया ।इस पर्व की तैयारी को लेकर नगर के एमजीरोड स्थित ज्वैलरी की दुकानों पर महिलाओ का तांता लगा रहा । इस पर्व पर पत्नियों की तैयारियों में पतियों ने भी भरपुर सहयोग दिया ।इस दिन जहा महिलाओ ने बिना पानी ,भोजन के व्रत किया ।वही कई पतियों ने भी व्रत किये ।जिंन्होने अपनी पत्नियों को पानी पिलाने के बाद भोजन ग्रहण किया ।

प्यार,स्नेह और विश्वास का प्रतीक है करवा चौथ व्रत ——
करवा चौथ व्रत पति-पत्नी के बीच प्यार,स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है । इस दिन सुहागन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। उल्लेखनीय है की गुरुवार शाम करीब 8 बजे चांद निकलने पर महिलाओ ने उनके दर्शन और अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला ।इस उपासना की तैयारी को लेकर एक दिन पहले से ही शहर का मुख्य बाजार गुलजार नजर आया । जहा महिलाओ ने अपने पूजन सामग्री की खरीदारी की ।और पुरुषों ने पत्नियों को उपहार देने के लिए खरीदारी की ।

