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Friday, 23 October 2026
देवास

घायल नर बाघ का रेस्क्यू कर किया प्राथमिक उपचार

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-बगैर हाथी के 4 घंटे में किया रेस्क्यू

अनोखा तीर, कन्नौद। मध्य प्रदेश के खिवनी अभयारण्य के कक्ष क्रं 208 से घायल नर बाघ टी-5 (टी-5) को आज सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। यह संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन विकास माहोरे अधीक्षक खिवनी अभ्यारण्य कन्नौद, स्थानीय वन स्टाफ और वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल के प्रसिद्ध वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता के आपसी सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। रेस्क्यू वन्यजीव नियमों के तहत निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करते हुए बाघ को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया गया और मौके पर ही उसका प्राथमिक उपचार किया गया। प्राथमिक चिकित्सा के दौरान जांच में सामने आया है कि  नर बाघ वर्चस्व की जंग/इलाके पर कब्जे को लेकर हुए एक हिंसक आपसी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हो गया है। बाघ की इस नाजुक शारीरिक स्थिति को देखते हुए अधीक्षक खिवनी अभ्यारण्य  एवं वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता द्वारा तुरंत वन मंडलाधिकारी अमित चौहान एवं भोपाल के उच्च अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया गया। सल्तनत की जंग… 10 साल से किंग लहूलुहान, अधिराज ने राजा बनने का युवराज दावा ठोका है। वहीं घटना को लेकर खींवनी अभ्यारण एसडीओ विकास मोहरे और रेंजर भीम सिंह सिसोदिया लगातार नजरे बनाए हुए हैं।
खिवनी अभयारण्य में पहला ऐसा सफल रेस्क्यू…
देवास के खिवनी अभयारण्य में बाघों की वर्चस्व की लड़ाई ने जंगल का सिंहासन बदल दिया है। पिछले एक दशक से इलाके के अल्फा मेल रहे 10 वर्षीय टाइगर युवराज को युवा बाघ अधिराज ने चुनौती देकर उसके क्षेत्र से बेदखल कर दिया। संघर्ष में युवराज गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके पंजों पर गहरे जख्म आए। वन विभाग की टीम ने उसे लंगड़ाते हुए देखा, जिसके बाद शनिवार को वन विहार भोपाल की टीम ने चार घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित भोपाल शिफ्ट किया। विशेषज्ञों के अनुसार टेरिटोरियल फाइट में बाघ एक-दूसरे के पंजों को निशाना बनाते हैं, ताकि प्रतिद्वंद्वी शिकार करने में अक्षम हो जाए। उम्रदराज युवराज युवा अधिराज की फुर्ती का मुकाबला नहीं कर सका और अब उसकी सल्तनत पर नए दावेदार का कब्जा हो गया है।
खिवनी का नया राजा.. अधिराज
शनिवार सुबह युवराज के रेस्क्यू की योजना बनाई गई। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि खिवनी में हाथी उपलब्ध नहीं था, जबकि आमतौर पर बाघों को हाथी की मदद से बेहोश किया जाता है। ऐसे में वन विहार भोपाल के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. अतुल गुप्ता व वन विभाग ने जोखिम उठाते हुए घायल बाघ को घेरकर ट्रैक्विलाइज किया। फिर युवराज को भोपाल शिफ्ट किया गया। खिवनी के 7 बाघों के कुनबे का जनक माने जाने वाले युवराज ने ही इस अभयारण्य को नई पहचान दिलाई थी। डॉक्टर द्वारा बताया गया कि बाघ को बेहोश करने वाली सुई या पिछले हिस्से की बड़ी मांसपेशि लगाई जाती है। गलत जगह लगने जान का खतरा हो सकता है। साथ ही बताया गया कि बाघ का 10 वर्ष की उम्र के बाद वर्चस्व घटने लगता है और 4-5 साल के युवा बाघ चुनौती देने लगते हैं। युवा बाघ पुराने अल्फा मेल के चिह्नित क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश करता है। हारने वाले को इलाका छोड़ना पड़ता है। टेरिटोरियल फाइट जीतने वाला बाघ इलाके में अपनी गंध व निशा छोड़कर दूसरे बाघों को संदेश देत अब यहां का अल्फा मेल बदल चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों की त्वरित संवेदनशीलता और आपसी सहमति के बाद, घायल बाघ को तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा और सघन निगरानी की आवश्यकता पायी गई। इसके बाद, रेस्क्यू किए गए घायल बाघ टी-5 को विशेष एम्बुलेंस और सुरक्षा व्यवस्था के साथ अग्रिम उपचार और पूर्ण स्वस्थ होने के लिए वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के लिए रवाना किया गया।

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