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Thursday, 29 October 2026
देवास

विलुप्त होती अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ का जुनून बरकरार

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– 24 घंटे चले मुकाबले, बुलेट जीतने रातभर उमड़ी भीड़

अनोखा तीर, सतवास। स्व. श्री नटवर बियानी की स्मृति में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता में ग्रामीण परंपरा, रोमांच और जनउत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। कन्नौद रोड स्थित तालाब मैदान में बुधवार दोपहर से शुरू हुई प्रतियोगिता गुरुवार दोपहर तक करीब 24 घंटे चली। प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आई 120 बैलगाड़ियों ने हिस्सा लिया। पूरी रात बड़ी संख्या में दर्शक मैदान और तालाब की पाल पर जमे रहे तथा रोमांचक मुकाबलों का आनंद लेते रहे। रातभर मैदान पर मेले जैसा माहौल बना रहा। प्रतियोगिता में कुल 8 पुरस्कार रखे गए थे। फाइनल मुकाबले में मगरिया के पदम पटेल के बैल शेरा-शक्ति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया और प्रथम पुरस्कार के रूप में रॉयल एनफील्ड बुलेट अपने नाम की। द्वितीय स्थान पर मगरिया के काव्यांश पटेल के बैल टाइगर-बब्या रहे, जिन्हें पल्सर बाइक पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई। तृतीय पुरस्कार के रूप में होंडा शाइन बाइक छोटी हरदा के प्रहलाद जेवल्या के बैल चिमनिया ओर नाथ को मिली। वहीं चतुर्थ पुरस्कार के रूप में इलेक्ट्रिक स्कूटी बजवाड़ा के रामभरोस जानी के बैल बब्या-विराट को प्रदान की गई। सभी विजेता बैल मालिकों को शील्ड एवं सम्मान देकर पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता के दौरान सबसे सुंदर बैल जोड़ी को भी विशेष पुरस्कार दिया गया। बड़कन ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि दिलीप पटेल द्वारा सुंदर बैल जोड़ी के मालिक को 7,100 रुपए नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन के दौरान देर रात जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष चौधरी भी प्रतियोगिता स्थल पहुंचे। इस अवसर पर दौड़ आयोजन समिति द्वारा उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए ग्रामीण परंपराओं को जीवित रखने के ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। प्रथम पुरस्कार जीतने के बाद विजेता बैल शेरा-शक्ति का बैंड-बाजों के साथ नगर में भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस सतवास के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जहां जगह-जगह लोगों ने विजेता बैलों का तिलक कर पुष्पमालाएं पहनाईं और उनका स्वागत किया। वहीं बैल मालिक पदम पटेल का भी नागरिकों द्वारा सम्मान किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और दौड़ प्रेमी जुलूस में शामिल हुए, जिससे पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि बदलते दौर में भी बैलगाड़ी दौड़ के प्रति लोगों का जुनून कम नहीं हुआ है। एक ओर जहां यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, वहीं सतवास में उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया कि ग्रामीण संस्कृति और लोक खेलों के प्रति लोगों का लगाव आज भी कायम है। बैलगाड़ियों की रफ्तार, दर्शकों का उत्साह और पूरी रात चले मुकाबलों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।

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