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Thursday, 22 October 2026
हरदा

तेरह दिन में सिर्फ 2 हजार क्विंटल गेहूं खरीदी

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-कछुआ चाल से बढ़ी किसानों की चिंता
अनोखा तीर, मसनगांव। प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर की जा रही गेहूं खरीदी की रफ्तार इस वर्ष बेहद धीमी नजर आ रही है। खरीदी शुरू होने के 13 दिन बाद भी महज 2 हजार क्विंटल गेहूं की ही तुलाई हो सकी है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार खरीदी की गति काफी कम है, जबकि औसतन अब तक करीब 20 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी हो जानी चाहिए थी। खरीदी केंद्रों पर प्रतिदिन केवल 20 से 25 ट्रॉली गेहूं की तुलाई हो पा रही है। छोटे किसानों की सीमित उपज के चलते एक किसान का औसत बिल 40 क्विंटल से अधिक नहीं बन पा रहा है। वहीं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था नहीं होने से उनकी उपज खरीदी से बाहर होती नजर आ रही है।
एक ही केंद्र पर खरीदी से बढ़ी परेशानी
इस वर्ष मसनगांव समिति द्वारा सुल्तानपुर वेयरहाउस पर एक ही खरीदी केंद्र बनाया गया है, जबकि पिछले वर्ष दो केंद्रों पर गेहूं और चना खरीदी की व्यवस्था थी। एक ही केंद्र होने के कारण किसानों को उपज बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। समिति के सहायक प्रबंधक अखिलेश पाटिल के अनुसार शासन के निर्देशानुसार बड़े रकबे वाले किसानों की स्लॉट बुकिंग फिलहाल बंद है, जिसके चलते केवल छोटे किसान ही अपनी उपज तुलाई के लिए केंद्र पर पहुंच पा रहे हैं।
ऋण और ब्याज की चिंता बढ़ी
उपज बिक्री में देरी के कारण किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। सहकारी समितियों से खाद-बीज के लिए ऋण लेने वाले किसानों को ब्याज सहित राशि चुकानी होगी। वहीं केसीसी धारकों को समय पर भुगतान नहीं करने पर 3 प्रतिशत ब्याज छूट से वंचित रहना पड़ेगा और उन्हें 7 प्रतिशत ब्याज देना होगा। किसानों का कहना है कि नगदी की जरूरत के चलते वे मजबूरी में मंडियों में कम दाम पर गेहूं बेचने को विवश हो रहे हैं।
समितियों पर भी बढ़ेगा दबाव
बड़े किसानों की खरीदी नहीं होने से ऋण वसूली भी प्रभावित हो रही है। कई किसान डिफॉल्टर की स्थिति में पहुंच रहे हैं, जिससे सहकारी समितियों को वसूली के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।
खरीफ सीजन पर भी असर की आशंका
जानकारों का मानना है कि यदि समय पर ऋण वसूली नहीं हो पाई, तो आगामी खरीफ सीजन में खाद वितरण प्रभावित हो सकता है। विपणन संघ द्वारा बकाया राशि के चलते खाद की आपूर्ति में कटौती की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे किसानों को निजी दुकानों पर निर्भर होना पड़ सकता है। धीमी खरीदी व्यवस्था, सीमित स्लॉट बुकिंग और एक ही केंद्र पर निर्भरता ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। यदि जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने से वंचित रह सकते हैं।

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