-आर्यिका संघ की आहार सेवा से जैन समाज ने पाया सौभाग्य
अनोखा तीर, हरदा। जैन आर्यिकाश्री 105 विज्ञानमती माताजी के नगर में तीस वर्षों बाद आगमन के तीसरे दिन आर्यिका संघ नागपुर की ओर रवाना हुआ। बिहार (पदयात्रा) के दौरान हरदा जैन समाज द्वारा भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया। सोडलपुर से लगभग आठ किलोमीटर आगे जैन समाज के श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ के लिए चौका लगाकर आहार व्यवस्था की। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जैन संतों को आहार देने का जैन समाज में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। जैन मान्यता के अनुसार प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 आदिनाथ भगवान को एक वर्ष आठ दिन के उपवास के पश्चात हस्तिनापुर के राजा श्रेयांस कुमार ने गन्ने के रस का आहार कराया था। इसी परंपरा का पालन करते हुए इस दिन जैन श्रावक मुनियों एवं आर्यिका माताजी को आहार कराकर स्वयं को धन्य मानते हैं। इस पुण्य कार्य में जैन समाज के राहुल गंगवाल, निलेश अजमेरा, संजय बजाज, बल्लू जैन, चर्चित गंगवाल, हर्षित जैन, अचित जैन, तनिष्क बड़जात्या, उषा बड़जात्या, सरोज बड़जात्या, ज्योति कटनेरा, शिखा गंगवाल, रिनी गंगवाल, रूबी जैन सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर भक्ति भाव से सेवा करते हुए धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाया।
अक्षय तृतीया …

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