स्व कराधान योजना में फिसड्डी बनी ग्राम पंचायतें

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-बांस-बल्ली के बहाने जमा होता था टैक्स
अनोखा तीर, मसनगांव। ग्राम पंचायतों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शासन द्वारा स्व कराधान योजना लागू की गई थी। इसके अंतर्गत पंचायत स्तर पर मकान कर, प्रकाश कर, जलकर, स्वच्छता कर, संपत्ति कर तथा व्यवसाय कर के रूप में ग्रामीणों से प्रतिवर्ष नगर पालिका की तर्ज पर टैक्स वसूली का प्रावधान किया गया है। बावजूद इसके, ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्स वसूली को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है, जिससे योजना प्रभावहीन साबित हो रही है। अधिकांश ग्राम पंचायतों में कर के नाम पर केवल जलकर की वसूली हो रही है। कुछ स्थानों पर मकान निर्माण की अनुमति या टीपी लेने पर ही मकान कर लिया जाता है। टैक्स की नियमित वसूली न होने से पंचायतों का पूरा दारोमदार 15वें वित्त और पांचवें वित्त की राशि पर टिका हुआ है। 15वें वित्त की राशि जनसंख्या के आधार पर दी जाती है, जिसका उपयोग टाइड और अनटाइड मदों के अनुसार किया जाता है। ऐसे में पंचायतों के पास अतिरिक्त खर्च के लिए केवल पांचवें वित्त की राशि ही बचती है, लेकिन उस पर भी कई प्रावधान लागू हैं, जिससे पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं हो पाता और विकास कार्य अटक जाते हैं। हाल ही में ग्राम के मुक्तिधाम में 4 लाख रुपए की लागत से सौंदर्यीकरण कार्य कराया गया, लेकिन राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसके कारण पंचायत पर मिस्त्री और अन्य संबंधित लोगों की देनदारियां बनी हुई हैं। पंचायत सचिव नंदलाल बघेल ने बताया कि पांचवें वित्त और स्टांप शुल्क की राशि पंचायत को मिलनी है, परंतु प्रदेश स्तर पर पंचायत पोर्टल पर ऑनलाइन प्रविष्टि नहीं होने से भुगतान अटका हुआ है। मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण कार्य की राशि का भुगतान लंबित है। इस संबंध में जिला पंचायत को पत्र लिखकर राशि डलवाने की मांग की गई है। इसी प्रकार कांकरिया में पंचायत भवन निर्माण के लिए शासन द्वारा जा

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