न दोषियों को सजा मिली न मिली पूरी राहत
हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में हुई थी १३ लोगों की मौत, ३०० लोग हुए थे घायल
अनोखा तीर, हरदा। ६ फरवरी २०२४ के दिन को हरदा का कोई भी नागरिक नहीं भूल सकता। कुछ लोगों के लालच के कारण इस दिन जहां १३ लोगों की जान चली गई, वहीं सैकड़ों लोग इस अवैध व्यापार के कारण घायल हो गए। कई लोगों के इलाज तो 2 साल बाद भी चल रहे हैं। बैरागढ़ में स्थित अग्रवाल बंधुओं की इस पटाखा फैक्ट्री मेें अनुमान से अधिक बारूद और अन्य विस्फोटक सामग्री के साथ हजारों लाखों की तादाद में सुतली बम रखे हुए थे। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में जब छोटी सी चिंगारी ने उस पटाखा फैक्ट्री में आग पकड़ी तो जहां वह पक्की पटाखा फैक्ट्री तो जमींदोज हुई थी, वहीं आसपास लगे ५० मकान भी पूरी तरह ध्वस्त हो गए। धमाका इतना तीव्र था कि पूरे हरदा शहर में भूकंप की तरह धरती कांप उठी। लोगों के शव दूर-दूर तक उड़कर फिका गए। राह पर चलने वाले राहगीर भी इस पटाखा फैक्ट्री के विस्फोट के कारण मृत्यु तक के शिकार हो गए। हरदा में हुए इस पटाखा फैक्ट्री की गूूंज देश ही नहीं विदेश तक गूंज उठी। तत्काल मदद के लिए तो सैकड़ों हाथ उठ खड़े हुए, लेकिन 2 साल बीतने के बाद एक-दो लोगों को छोड़ दिया जाए तो कोई उनकी ओर झांकने को भी तैयार नहीं है। 7 परिवार अभी तक राहत शिविर में ही रहने को मजबूर हैं। देखने वाली बात यह है कि इस पटाखा फैक्ट्री को अवैध रूप से संचालित करने वाले व्यापारी बंधुओं को अभी तक सजा नहीं मिल पाई है। प्रशासन की ओर से भी जो राहत राशि पीड़ितों को प्राप्त होनी थी, वह भी अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है।
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