बैरिकेट्स कूदकर अंदर पहुंचा स्वर्ण समाज, सौंपा ज्ञापन
– यूजीसी एक्ट को लेकर दर्ज कराया विरोध
अनोखा तीर, हरदा। सवर्ण समाज के बैनर तले परशुराम सेना एवं राजपूत परिषद के सदस्यों ने गुरूवार को यूजीसी एक्ट को लेकर अपना विरोध प्रकट किया। स्थानीय परशुराम चौक पर दोपहर 2 बजे एकत्रित होकर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे। जहां कलेक्ट्रेट के मुख्यद्वार पर बैरिकेट्स लगे थे। लेकिन, कुछ देर इंतजार करने के बाद सवर्ण समाज के लोग बैरिकेट्स हटाकर अंदर पहुंच गए। इस दौरान यूजीसी एक्ट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तभी वहां पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी को महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया। जिलाध्यक्ष नितिन जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू नियमों के विरोध में सवर्ण समाज के लोग शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा एवं शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग को लेकर यहां आए हैं। उन्होंनें कहा कि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, छात्रों, शिक्षकों तथा सामाजिक संतुलन के लिए कड़े नियम गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। इन नीतियों का प्रतिकूल प्रभाव सवर्ण समाज सहित अन्य वर्गों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों पर पड़ रहा है। छात्रों पर शैक्षणिक एवं मानसिक दबाव असहनीय स्तर तक बढ़ रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्नति एवं सेवा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं उच्च शिक्षा का अत्यधिक व्यवसायीकरण हो रहा है। जिसके चलते सवर्ण समाज के मेधावी एवं आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के साथ अन्य वर्गों के छात्रों के लिए भी समान अवसर सीमित होते जा रहे हैं। उन्होंनें यह भी कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार, अनुच्छेद 15 भेदभाव का निषेध तथा अनुच्छेद 21 की मूल भावना पर आधारित होनी चाहिए। शिक्षा में अवसर केवल जातिगत आधार पर नहीं बल्कि योग्यता, आर्थिक स्थिति तथा वास्तविक सामाजिक पिछड़ेपन के समुचित आंकलन के आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यह भी कहा कि बिना व्यापक जनसंवाद, विधिक समीक्षा एवं सामाजिक प्रभाव के आंकलन के लागू किए गए नियम संवैधानिक मर्यादाओं एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हैं। सवर्ण समाज ने ऐसे नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर पुन: समीक्षा करने की मांग की। साथ ही शिक्षा एवं आरक्षण व्यवस्था को केवल जातिगत न रखकर योग्यता एवं आर्थिक आधार से भी जोड़ा जाए, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद प्रतिभाओं को अवसर मिल सके। वहीं शिक्षा के निजीकरण पर नियंत्रण लगाते हुए सरकारी शिक्षण संस्थानों को सशक्त किया जाए। अंत में कहा कि अगर सवर्णो की मांगों पर शीघ्र एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो सवर्ण समाज को विवश होकर संविधान के दायरे, लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का मार्ग अपनाना पड़ेगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की रहेगी। इस मौके पर परशुराम सेना के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सुधीर शर्मा, करणी सेना के जिलाध्यक्ष सुनील सिंह राजपूत, सर्व ब्राहमण समाज के महामंत्री लोकेश शर्मा, आचार्य ओमप्रकाश पुरोहित सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

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