-प्रतिबंध हटते ही जिले से बाहर होगा परिवहन, महंगे भाव मेें होगी बिक्री
लोकेश जाट, हरदा। जिले से बाहर भूसे के परिवहन पर कलेक्टर आदित्य सिंह ने कुछ समय पहले आदेश जारी करते हुए प्रतिबंध लगाया। जिसका तोड़ भूसा माफिया ने निकाल रखा है। जिले से बाहर भूसा ना ले जाते हुए किसानों के खेतों में जमीन लीज पर ली और जगह-जगह भूसे के ढेर लगा कर रख लिए है। अब जैसे ही प्रतिबंध हटेगा यह भूसा आसानी ने जिले की सीमा पार करते हुए अन्य जिलों में जाएगा और महंगे भाव में इसकी बिक्री होगी। यह प्रतिबंध इस लिए लगाया गया की जिले में भूसे की कमी के चलते गौवंश को समस्या ना आए और उन्हें पर्याप्त भूसा मिले। यदि भूसा जिले से बाहर जाना ही है, तो फिर इस तरह के प्रतिबंधात्मक आदेश का क्या मतलब रह जाएगा। बताया जा रहा है कि भूसे की खरीददारी राजस्थान के एक व्यापारि द्वारा की गई है, जिसने किसानों की जगह-जगह भूमि का कुछ हिस्सा लिज पर लिया है और वहां भूूसे का ढेर लगा रखा है। यह ढेर किसानों के खेतों में जगह-जगह देखें जा सकते है। भूसे के ढेरों को पानी से बचाने के लिए बकायदा त्रिपाल से ढका गया है। ऐसा नहीं है कि यह मामला प्रशासन से छिपा हो, क्योकि यह बड़े-बड़े ढेर सड़क से दिखाई देते है। जब प्रतिबंध की मंशा जिले की गोवंश को प्रयाप्त भूसा उपलब्ध कराना थी, तो फिर इस तरह के कार्य पर कोई कार्यवाही क्यूं नहीं हो रही है। पिछले वर्ष भी भूसा परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया और बाद में इस तरह ही भूसा इक्कठा किया गया। बाद में भूसे को जिले से बाहर ले जाया गया। सूत्रों की माने तो प्रतिबंध के दौरान खरीदा गया कम भाव में भूूसा प्रतिबंध हटते ही भूसे की कमी के चलते महंगे भाव पर बेचा जाता है। यही कारण है कि बाहर के व्यापारि पहले किसानों से भूसा खरीद कर जिले की सीमा में ही खेतों में इक्कठा कर लेते है और बाद में मनमाफिक मूल्य पर बिक्र करते है।
प्रतिबंध के दौरान सेटिंग से जिले से बाहर गया भूसा
गौरतलब है कि जिले से बाहर भूसे के परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया। बावजूद इसके कई गाड़ी भूसा जिले की सीमा पार पहुंच गया। सूत्रों की माने तो यह सब सेटिंग का काम था। भूसे से लबालब भरी कई गाड़ियां जिले से बाहर जाती देखी गई और इन गाड़ियों ने कई पुलिस चौकी और थाना क्षेत्र भी पार किए। सेटिंग इस तरह की कि एक गाड़ी छोडने पर ३०० रुपए फिक्स किया गया और तय हुआ की भूसे की गाड़ी देर रात ही चौकी तथा थाने क्षेत्र से निकलेगी। इन निकलने वाली गाड़ियों को बकायदा चेक भी किया जाता था, पर चेकिंग इस बात की होती थी कि इस गाड़ी का तय रुपया आया या नहीं। अगर रुपया आया है तो गाड़ी आगे जाएगी अन्यथा चौकी पर खड़ी कर ली जाती थी और रुपया मिलने पर सम्मान छोड़ दी जाती थी। यह खेल रोजाना रात के अंधेरे में खेला जाता था। जब शिकायत होती और आला अधिकारी सख्त होते तो घूस की रोटी खाने वाले कर्मचारी भूसे गाड़ी वाले को मैसेज कर देते कि मामला गर्म है, एक-दो दिन शांति रखों। एक दो दिन के बाद फिर खेल शुरू हो जाता है। इस तरह भूसे की कई गाड़िया जिले की सीमा पार पहुंच गई।
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