अस्पतालों को निजी हितधारकों को देने का विरोध

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अनोखा तीर, रहटगांव। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट में मेडिकल कॉलेज, प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सिविल अस्पतालों को निजी और जन भागीदारी (पीपीपी) के तहत संचालित करने की मध्यप्रदेश सरकार की मंशा जाहीर की। साथ ही उन्होंने 3 मेडिकल कॉलेज निजी हितधारकों को देने की बात भी कही है। परंतु यह नहीं बताया कि किन 3 मेडिकल कॉलेज को निजी हितधारकों को दिया गया है। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव ने कुछ दिनों पहले स्वास्थ्य संस्थानों का निजीकरण नहीं करने की बात कही थी, परंतु आज फिर से स्वास्थ्य संस्थानों के निजीकरण की बात कर सरकार की मंशा जाहिर की है। मध्यप्रदेश सरकार निजी हितधारकों को फायदा पहुंचाने के लिए मेडिकल टुरिज़्म को बढ़ावा देना चाहती है। ज्ञात हो कि कुछ माह पूर्व ही मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के 12 जिलों में पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके लिए जिला अस्पतालों को निजी हितधारकों को देने की बात कही गई थी। परंतु जिला अस्पतालों के सीधे सीधे निजी हितधारकों को देने के फैसले का जनता ने व्यापक विरोध किया था। जिसके चलते प्रदेश सरकार ने अपना निर्णय बदलते हुए जिला अस्पतालों को निजी हाथों में नहीं देने का निर्णय लिया था। परंतु अब सरकार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सिविल अस्पतालों को निजी हाथों मे देने की बात कर रही है। मध्य प्रदेश अस्पताल बचाओ जीव बचाओ के अमूल्य निधि  और जन स्वास्थ्य  अभियान इंडिया के एसआर आज़ाद, राजकुमार ने मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी अस्पताल या स्वास्थ्य कंेद्र का निजीकरण नहीं करें और स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करें और सरकार से मांग की है कि चिकित्सा शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और वहनीय बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज का संचालन भी सरकार करें। मांग करने वालों में क्षेत्र के ज़िन्दगी बचाओ अभियान संगठन मध्यप्रदेश संगठन के साथी के नाम रामप्रसाद काजले, जगदीश देवड़ा, बक्सराम लविसकर, रमेश, हिरामन काजले शामिल रहे।

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