विश्व रेडियो दिवस आज…

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यहां आज भी है रेडियो को लेकर लोगों में दीवानगी

अनोखा तीर, हरदा। समय बदला, समय के साथ कई चीजें बदल गईं, सिर्फ नहीं बदली तो लोगों की रेडियो सुनने की दीवानगी। वक्त के साथ रेडियो का स्वरूप बदला है। पहले रेडियो को एक जगह पर पूरे परिवार के साथ लोग सुनते थे। अब भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोग समय के अभाव में आधुनिकता के युग में स्मार्ट फोन से रेडियो सुनना पसंद करते हैं। तो कई ऐसा श्रोता है जो अब भी पूरी शिद्दत से रेडियो सुनते हैं। आज भी लोग हजारों की संख्या में पत्र भेजकर अपनी पसंद के फरमाइशी कार्यक्रम सुनते हैं। यह हाल है आकाशवाणी सहित तमाम रेडियो चैनलों में, जो अब एफएम के नाम से जाने जाते हैं। खेड़ीपुरा निवासी नगर में टेलर का काम करने वाले 65 वर्षीय मनोहर लाल मोराने भी रेडियो के नियमित श्रोता हैं। वे बताते है कि बचपन से रेडियो सुन रहे हैं। रेडियो सुनने की अब आदत सी पड़ गई है। वे रेडियो रोजाना 10 घंटे सुनते हैं। काम के साथ रेडियो पर अच्छा मनोरंजन हो जाता है। नए-पुराने गाने सुनने को मिलते हैं। समाचार के माध्यम से जानकारी मिल जाती है। प्रधानमंत्री की मन की बात कार्यक्रम भी रेडियो पर सुनते है। रेडियों पर प्रसारित विविध भारती के कार्यक्रम रोजाना सुनते है। वह हमेशा अपने पत्र फरमाइश, सुझाव के लिए आकाशवाणी केंद्रों में भी भेजते हैं। उन्होंने अपने पुराने रेडियो को सहेजकर रखा है। अपने काम के साथ-साथ रेडियो पर प्रसारित विविध भारती के कार्यक्रम सुनते है। रोजाना उस पर गीत संगीत सुनने उन्हें बहुत अच्छा लगता है। वे इसके अलावा रेडियो में अपना नाम सुनने के लिए रोजाना पोस्टकार्ड या मोबाइल द्वारा मनपसंद गीत भेजना उनकी दिनचर्चा में शामिल है। वे ज्यादातर पुराने हिंदी गाने सुनने के लिए पत्र लिखते हैं। उन्होंने बताया कि जिले में करीब कई बार रेडियो एफएम बैंड बंद रहता है। स्थानीय रेडियो प्रसारण केन्द्र से विविध भारती एफएम रेडियो का प्रसारण नियमित नहीं चलता।

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