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Wednesday, 14 October 2026
हरदा

परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद  बनेंगे आधा दर्जन नए जिले

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– नए जिलों के लिए करना होगा दो साल तक का इंतजार
– सागर, उज्जैन, छतरपुर, छिंदवाड़ा, इंदौर जैसे जिले टूटेंगे
दिनेश निगम ‘त्यागीÓ भोपाल।
प्रदेश में नए परिसीमन आयोग के गठन के साथ भविष्य में बनने वाले नए जिलों को लेकर उम्मीद जाग गई है। फिलहाल बीना और लखनादौन को जल्दी नए जिले घोषित करने की संभावना थी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के बीना दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा था। बीना की कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी छोड़कर भाजपा में इसी शर्त के साथ आई थीं कि बीना को जिला घोषित किया जाएगा। दूसरी तरफ सागर जिले के भाजपा के कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह खुरई को जिला घोषित कराने का प्रयास पहले से कर रहे थे। इस खींचतान का नतीजा यह हुआ कि मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने नए परिसीमन आयोग की घोषणा कर दी। इससे साफ हो गया कि जब तक आयोग की रिपोर्ट नहीं आएगी, तब तक कोई नया जिला नहीं बनेगा। इस लिहाज से नए जिले की मांग करने वालों को दो साल तक का  इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल आयोग का कार्यकाल एक वर्ष का है लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है। इतना तय है कि रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश में आधा दर्जन से ज्यादा नए जिले बनाए जा सकते हैं। इसके लिए सागर, उज्जैन, छतरपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, गुना, शिवपुरी, इंदौर जैसे जिलों को तोड़ा जा सकता है।
2003 के बाद प्रदेश में बने 7 नए जिले
प्रदेश में वर्ष 2003 के बाद 7 नए जिलों का गठन हुआ है। 2003 में प्रदेश में कुल 48 जिले थे जो 2008 में बढ़कर 50 और 2013 में 51 हो गए। 2018 में जिलों की संख्या 52 पहुंची और 2023 में कुल 55 जिले हो गए। इनमें तीन जिले मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर पिछले साल विधानसभा चुनाव के पहले अस्तित्व में आए थे। रीवा से अलग कर मऊगंज को जिला बनाया गया। छिंदवाड़ा से अलग कर पांढुर्णा को और सतना से अलग कर मैहर को जिला मुख्यालय का तमगा मिला। इससे पहले निवाड़ी और सिंगरौली जिले बनाए गए थे। विधानसभा चुनाव के पहले प्रदेश को तीन नए जिले मिलने के बाद से प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से नए जिलों के गठन की मांग उठने लगी है।
कई तहसीलों को जिला बनाने की हो रही मांग
प्रदेश के सागर, खरगोन, छिंदवाड़ा, छतरपुर, गुना और धार जिलों की कई तहसीलों को जिला बनाने की मांग की जा रही है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद इनमें से कुछ तहसीलों को जिला बनाना तय है। सागर से अलग कर बीना को जिला बनाने की मांग तो उठ ही रही है। दूसरा पक्ष सागर से अलग कर खुरई को जिला बनाने की मांग कर रहा है। छतरपुर जिले में लवकुश नगर और बड़ा मलेहरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से चल रही है। गुना से अलग कर चाचौड़ा को जिला बनाने की मांग हो रही है। सिवनी जिले के लखनादौन को जिला बनाने की भी मांग है। डिंडौरी जिले के शाहपुरा को जिला बनाने की मांग उठी थी। उज्जैन से अलग कर नागदा को जिला बनाने की मांग हुई। बालाघाट क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने बालाघाट से तीन जिले बनाने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा था।
शिवराज कर चुके थे कुछ नए जिलों की घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कुछ स्थानों पर जाकर नया जिला बनाने की घोषणा कर चुके थे लेकिन वे अटक कर रह गए। शिवराज ने 20 जुलाई 2023 को कहा था कि उज्जैन से अलग कर नागदा को जिला बनाएंगे। यह जिला अभी गठित नहीं हुआ है। उन्होंने 22 अगस्त 2023 को पिछोर को नया जिला बनाने की घोषणा की थी। यह शिवपुरी जिले से अलग कर बनाया जाना था लेकिन यह अभी जिला नहीं बना है। पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के प्रयास से उन्होंने खुरई को भी जिला बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बीना को जिला बनाने की मांग के कारण यह भी अटक गया।
ज्यादा दूरी के कारण बन सकते हैं ये नए जिले
जिलों से तहसीलों की दूरी को ध्यान में रखकर परिसीमन आयोग नए जिले बनाने की सिफारिश कर सकता है। जैसे, सागर से बीना की दूरी 74 किमी और खुरई की 52 किमी है। इनमें से किसी एक को जिला बनाया जा सकता है। छतरपुर जिले में लवकुश नगर की दूरी 60 किमी और बड़ा मलेहरा की 50 कि.मी है। इनमें लवकुश नगर को जिला बनाने की ज्यादा संभावना है। गुना से चाचौड़ा की दूरी 64 किमी, उज्जैन से नागदा की दूरी 96 किमी और शिवपुरी से पिछौर की दूरी लगभग 76 किमी है। इन्हें नया जिला बनाया जा सकता है। डबरा को जिला बनाने का आश्वासन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरािदत्य सिंिधया एक चुनावी सभा में दे चुके हैं। सिवनी का लखनादौन भी जिला बनने की कतार में है। हालांकि इनमें से कौन सी तहसीलें जिला बनेंगी, यह काफी हद तक परिसीमन आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।

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