व्यंग्यकारों के गुरु थे हरिशंकर :  प्रियदर्शी खैरा

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हरिशंकर परसाई जन्मशती समारोह अंतर्गत  व्यंग्य गोष्ठी संपन्न


अनोखा तीर, भोपाल। दुष्यंत स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय सभागार के राज सदन में लब्ध प्रतिष्ठित व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के जन्मशती समारोह का आयोजन वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रियदर्शी खैरा की अध्यक्षता, प्रतिष्ठित व्यंग्यकार मलय जैन के मुख्य आतिथ्य, प्रसिद्ध व्यंग्य लेखिका डॉ साधना बलबटे के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए नगर के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश पटवा ने हरिशंकर परसाई पर बीज वक्तव्य देते हुए परसाई के व्यक्तित्व और कृतित्व पर रोचक ढंग से प्रकाश डाला कि उन्होंने किस तरह गद्य लेखन की व्यंग्यात्मक शैली को एक साहित्यिक विधा में तब्दील कर दिया। इस अवसर पर प्रियदर्शी खैरा ने अध्यक्ष की आसंदी से बोलते हुए कहा कि आज गुरु पूर्णिमा पर नगर के व्यंग्यकारों ने व्यंग्य गुरु हरिशंकर परसाई को याद करते हुए व्यंग्य हवन में आहुतियां दीं। मलय जैन ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि परसाई जी को व्यंग्य विधा के आधार स्तंभ बताते हुए व्यंग्य साहित्य में उनके योगदान की याद दिलाई, फिर उन्होंने दिल थामिये भाई साहिब रचना का पाठ किया। विशिष्ट अतिथि डॉ साधना बलबटे ने कहा कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े व्यंग्य सुनाते हुए व्यंग्य को लोकजीवन से उपजा बताया। सुदर्शन सोनी ने साधने की कला, यशवंत गोरे ने जूता एक काम अनेक, विवेक रंजन श्रीवास्तव ने बेगानी शादी अब्दुल्ला दीवाना शारदा दयाल श्रीवास्तव ने प्रखर जगत के खर, कमल किशोर दुबे ने शालीनता का अपहरण, जयजीत अकलेचा ने बजट हलवे की कढ़ाई से बातचीत व्यंग्य सुनाये। कार्यक्रम का संचालन लेखक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र गट्टनी ने किया। स्वागत उद्बोधन दुष्यंत स्मारक संग्रहालय की सचिव करुणा राजुरकर ने दिया और आभार संस्था के अध्यक्ष रामराव वामनकर ने व्यक्त किया।  इस महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यक्रम में ऋषि श्रृंगारी, गोकुल सोनी, अशोक व्यास, विभा सिन्हा, आरती शर्मा, संजय कुमार, वीरेंद्र श्रीवास्तव, बिहारी लाल सोनी अनुज, वृक्ष मित्र सुनील दुबे, मीनू पांडे, सुधा दुबे, विशाखा राजुरकर सहित शहर के अनेक गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे।

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