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Sunday, 18 October 2026
हरदा

नालों का मिल रहा गंदा पानी, कैसे बनाएंगे अजनाल नदी को शुद्ध

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लोकेश जाट, हरदा। शहर की लाईफ लाईन कही जाने वाली अजनाल नदी को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल संवर्धन अभियान के तहत उसे शुद्ध करने और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद की जा रही है। जिसके लिए करोड़ों रुपए की योजना बनाकर इसे विकसित करने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। उपरी तौर पर तो रंग-रोगन और कार्यक्रम आयोजित कर अजनाल को विकसित करने की जो मुहिम चल रही है उसे देखकर ऐसा लगता है कि कुछ ही दिनों में यह नदी साबरमति नदी के तरह साफ और शुद्ध हो जाएगी, लेकिन अजनाल नदी को विकसित करना सीधा और सरल नही है। शहर के लगभग आधा दर्जन से अधिक नालों का गंदा पानी सीधे अजनाल नदी में जाकर मिलता है। जब तक इन नालों को परिवर्तित या इस गंदे पानी को शुद्ध करने का काम नहीं होगा तब तक अजनाल शुद्धिकरण की बात करना बैमानी होगा। आज अजनाल नदी की यह स्थिति है कि यह एक गंदे नाले के रूप में तब्दील हो गई है।

ऐसे में शहरवासियों को जिस तरह का स्वच्छ, सुंदर और शुद्ध वातावरण वाला पर्यटक स्थल देने का प्रयास किया जा रहा है वह इस स्थिती में कारगार होता नहीं लग रहा है। बारिश होते ही नदी के ऊपरी क्षेत्र का कचरा पेड़ीघाट पहुंच जाएगा। केवल पेड़ी घाट की सफाई कराकर पर्यटक स्थल बनाया जाता है तो भविष्य में उसका कोई फायदा मिलते नहीं दिखाई दे रहा है, क्योंकि नदी के बाकी एरिये में फैली गदंगी और बदबू पर्यटकों को यहां ज्यादा देर टिकने नहीं देगी। पहले शहर से लगे अजनाल नदी के पूरे एरिये की साफ-सफाई की जानी चाहिए। साथ ही नदी में मिल रहे नालों की निकासी व्यस्था अलग करनी चाहिए। अजनाल नदी पेड़ीघाट के उपर की ओर किनारे पर स्थित मानपुरा के रहवासी तनवीर खान ने बताया कि यहां नदी में पसरी गंदगी से इतनी बदबू आती है कि यहां से गुजरने वाले को अपनी नाक पर बंद करना पड़ता है। आस-पास के क्षेत्र के लोगों का यहां रहना मुश्किल हो गया है। रात में और ज्यादा दिक्कत बड़ जाती है, जब बदबू के साथ मच्छरों का प्रकोप झेलना पड़ता है। किनारों पर मवेशियां इसी का पानी पीने को मजबूर है, जबकि इसका पानी पशुओं के पीने योग्य भी नहीं है। केवल एक जगह की सफाई करके वाहवाही लूटने का काम किया जा रहा है।

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