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Friday, 16 October 2026
इंदौर

आउट आफ सिलेबस प्रश्न पत्र से अब पेपर सेटर की योग्यता पर उठे सवाल

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अनोखा तीर इंदौर:-पेपर आउट होने के बाद अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में प्रश्न पत्र में गड़बड़ियां नहीं थम रही है। पाठ्यक्रम के बाहर से प्रश्न पूछे जाने और मिसप्रिंट से विश्वविद्यालय प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई है। ऐसे में अब प्रश्न पत्र तैयार करने वालों की योग्यता पर सवालों खड़े होने लगे हैं।

पेपर सेटर की गलतियों का खामियाजा विश्वविद्यालय को भुगतना पड़ता है। इससे विश्वविद्यालय का समय बर्बाद होता है। साथ ही पढ़ने वाले छात्रों को भी नुकसान होता है। मामले में अब विश्वविद्यालय ने चुनिंदा शिक्षकों से प्रश्न पत्र बनवाने का फैसला किया है।

पिछले एक साल में कई विषयों के प्रश्न पत्र में आउट आफ सिलेबस और मिसप्रिंट की शिकायतें सामने आई है, जिसमें बीकाम, बीएड, एमबीए सहित कई पाठ्यक्रम के अलग-अलग विषय है। विद्यार्थियों की समस्या का निराकरण करने के लिए विश्वविद्यालय ऐसे प्रश्न पत्र को परीक्षा समिति के समक्ष रखे।

बोर्ड आफ स्टडी और डीन सहित कई विषय विशेषज्ञ अपनी राय देते हैं। उनकी रिपोर्ट के बाद विश्वविद्यालय फैसला लेते हैं। कई मामलों में जिन छात्र-छात्राओं ने उक्त प्रश्नों को हल करने का प्रयास किया रहता है। उन्हें बोनस अंक दिए जाते है। ऐसे में उन विद्यार्थियों के साथ गलत होता है, जो उक्त प्रश्न हल करने की बजाए उसका वैकल्पिक प्रश्न का जवाब देते हैं।

इन गड़बड़ियों के बावजूद विश्वविद्यालय कभी इन पेपर सेटरों पर कोई कार्रवाई नहीं करती है। न ही ब्लैक लिस्ट करती है। इसके चलते ऐसी गड़बड़ियां बार-बार देखने को मिलती है। वैसे विश्वविद्यालय प्रश्न पत्र तैयार करवाने का काम कालेज कोड 28 के तहत नियुक्त शिक्षक को देते हैं। मगर कभी निर्धारित पैनल से पेपर नहीं बनवाया जाता है। मजबूरन किसी भी नए शिक्षक को पेपर बनाने की जिम्मेदारी दे देते हैं, जिन्हें विषय से संबंधित ज्ञान नहीं होता है।

देते हैं कम मानदेय

पेपर सेटर करने के लिए विश्वविद्यालय ने मानदेय राशि तय कर रखी है, जो विषय विशेषज्ञों को कम लगती है। इसके चलते वे पेपर तैयार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। कई बार विश्वविद्यालय में महीनों तक पेपर सेटर का बिल पास नहीं होता है। कभी वित्त विभाग तो कभी आडिट इन बिल पर आपत्ति उठाती है। यही वजह है कि अनुभवी शिक्षक दूरियां बनते हैं।

बनाएंगे शिक्षकों का पैनल

पेपर सेट करने के लिए कोड-28 में नियुक्त शिक्षकों को जिम्मेदारी देते हैं। मगर जल्द ही चुनिंदा पेपर सेटर रखेंगे। इसके लिए एक पैनल बनाएंगे, जिसमें सिर्फ विषय विशेषज्ञों को रखा जाएगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने के बाद निर्णय लेंगे।

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