विकास पवार बड़वाह – रावत पलासिया के जंगलों में बनने वाली हाथ भट्टी शराब से जुड़े लोगो इन दिनों अवैध शराब की कार्यवाही से नाराज दिखाई दे रहे है ।ऐसा इसलिए क्योंकि हाल ही में रावत पलासिया की रहवासी युवती पूजा चौहान ने अपने शराबी पिता से परेशान होकर आत्मदाह किया था ।तब मृतिका ने इस घटना को लेकर पिता, पुलिस और शराब बैचने वालो को दोषी बताया था ।जिसके बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने लगातार जंगलों में अवैध शराब निर्माण के ठिकानों पर कार्यवाही कर हजारों लीटर महुआ लहान नष्ट कर शराब जप्त की थी ।जिसके बाद से ही जंगल के उन ठिकानों पर आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया । जहा हाथ भट्टी पर शराब बनाई जा रही थी ।

अब तक जंगल के कई हिस्सों में लगाई आग —–
बड़वाह के जंगल क्षेत्रो में विगत कई सालो से हाथ भट्टी शराब बनाने का काम जारी है। जहा भट्टीया जलाने में जंगल की लकड़ियां काट कर उपयोग में लाई जाती है ।लेकिन विगत कुछ सालो से इस जंगल में आग लगने जैसी घटनाओं पर विराम लगा हुआ था ।जिसके बाद अब जंगल जलाने का मामल शुक्रवार दोपहर में प्रकाश में आया। जिसकी जानकारी बड़वाह रेंजर धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने देते हुए बताया की कुछ दिनो में शराब निर्माण पर हुई कार्यवाही के बाद उन स्थानों पर आग लगने की घटना देखी जा रही है ।जिसको देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है की यह आग लगाने का कृत्य कार्यवाही से जुड़े लोगो द्वारा किया जा रहा है। जबकि पूर्व में भी जब कार्यवाही हुई थी ।तक कुछ लोगो द्वारा बिट कर्मचारियों को शराब पर कार्यवाही होने पर जंगल में आग लगाने और लकड़ियां काटने की चेतावनी दी गई थी ।जिसके आधार पर यह कहना गलत नही होगा की यह कृत्य शराब माफिया ही कर रहे है ।हालाकी यह आग लगाने का सिलसिला दो दिनों से देखा जा रहा है ।जिसके चलते करीब सात आठ स्थानों पर आग लगाई गई है ।उल्लेखनीय है की आग की सूचना पर वन मंडल अधिकारियो ने अपने अधीन कर्मचारियों के साथ आग पर काबू पा लिया ।लेकिन शराब पर होने वाली इस कार्यवाही से अब जंगल जलाना कहा तक उचित हैं।
Views Today: 2
Total Views: 114

