-किशोरियों ने दिया चुप्पी तोड़ो, खुलकर बात करो का संदेश
अनोखा तीर, हरदा। हरदा जिले में माहवारी स्वच्छता पर केंद्रित जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। माहवारी के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ इस विषय पर बात करने के सामाजिक संकोच को दूर करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल एवं महाविद्यालयों की किशोरी बालिकाओं के साथ जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। स्थानीय ग्वालनगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र पर पोस्टर मेकिंग, रैली एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में शामिल किशोरी बालिकाओं ने चुप्पी तोड़ो, खुलकर बात करो का संदेश पोस्टरों के माध्यम से दिया। वहीं ग्वालनगर में रैली निकालकर इस विषय पर समाज में व्याप्त झिझक को कम करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की उमंग काउंसलर पारुल काशिव, महिला एवं बाल विकास विभाग से प्रभारी परियोजना अधिकारी भारती भल्लावी, पर्यवेक्षक पूजा चौहान, रेखा गौर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मीनू लाहोरे, सुनीता चौरे, मुनेश उमरिया, सपना शर्मा, रानी वर्मा, सुनीता दूधे, माया चौरे सहित बड़ी संख्या में आसपास के वार्डों की किशोरी बालिकाएं उपस्थित रहीं। उमंग काउंसलर पारुल काशिव ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताते हुए कहा कि माहवारी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों, अंधविश्वासों एवं हिचकिचाहट को समाप्त करना आवश्यक है। साथ ही गरीब एवं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और किशोरियों तक सैनिटरी पैड, स्वच्छ पानी एवं सुरक्षित शौचालयों की पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्कूल जाने वाली बच्चियों को सही जानकारी देने से वे पीरियड्स के दौरान स्कूल छोड़ने जैसी समस्या से बच सकेंगी। प्रभारी परियोजना अधिकारी भारती भल्लावी ने माहवारी स्वच्छता को लेकर ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, वहीं पर्यवेक्षक पूजा चौहान ने सामाजिक कुरीतियों एवं भ्रांतियों पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि आज भी समाज में महिलाओं एवं किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े कई विषयों पर खुलकर चर्चा नहीं की जाती। माहवारी स्वच्छता प्रबंधन भी ऐसा ही विषय है, जिस पर वर्षों से चुप्पी बनी हुई है, जबकि यह किशोरियों के मानसिक एवं शारीरिक विकास से सीधे जुड़ा हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि किशोरावस्था में 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच माहवारी की शुरुआत होती है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में किशोरियां इसे सामान्य शारीरिक प्रक्रिया के बजाय सामाजिक संकोच का विषय मान लेती हैं। इससे उनके आत्मविश्वास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए सुरक्षित माहवारी अत्यंत आवश्यक है। माहवारी से जुड़ी गलत धारणाओं और मिथकों को दूर करने के लिए किशोरियों से इस विषय पर खुलकर चर्चा करना जरूरी है। इससे संक्रमण की संभावना कम होती है और लड़कियों की स्कूल में उपस्थिति भी बढ़ती है।
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