अनोखा तीर, हरदा। जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर द्वारा आयोजित पांच दिवसीय संस्कार शिविर का समापन गुरु जंभेश्वर मंदिर विश्नोई संत आश्रम नेमावर में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिविर संयोजक स्वामी आत्मानंद ने की। मुख्य अतिथि मध्य क्षेत्र बिश्नोई सभा के अध्यक्ष आत्माराम पटेल रहे। विशेष अतिथि कोषाध्यक्ष श्यामलाल बाबल, लक्ष्मीनारायण पवार, राहुल पटेल तथा राजस्थान से आए प्रशिक्षक हरिराम खीचड़ उपस्थित रहे। अतिथियों ने शिविरार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। नेमीचंद बेनीवाल ने शिविर प्रतिवेदन का वाचन करते हुए पांच दिनों में आयोजित गतिविधियों की जानकारी दी। शिविरार्थियों ने जंभेश्वर भगवान के उपदेश, 29 नियमों की व्याख्या, शिक्षा, संस्कार, योग एवं खेल का महत्व, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तित्व विकास तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। शिविर संचालन में जाम्भाणी साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय संगठन सचिव पूनमचंद पवार, कैलाश गोदारा, कैलाश आंजना, मनमोहन पवार, अमृतलाल पूनिया, दिनेश सारन गुरु जी, रामसुख बेनीवाल, राजेंद्र भादू, नेमीचंद बेनीवाल, ईश्वर स्याग, उमेश बेनीवाल, डॉ. इंद्रपाल जानी, योगेश जानी एवं पूनम जानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पांच दिवसीय शिविर के दौरान विद्यार्थियों की क्षमता वृद्धि के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। सभी शिविरार्थियों एवं शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और बैग देकर सम्मानित किया गया। अतिथियों का सम्मान जंभेश्वर भगवान के साहित्य एवं केप भेंटकर किया गया। आत्माराम पटेल ने कहा कि बच्चों को अपने माता-पिता का आजीवन सम्मान और सेवा करनी चाहिए। इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं है। हरिराम खीचड़ ने शिविर से सीखी बातों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्मीनारायण पवार ने शिक्षा, संस्कार और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी आत्मानंद ने बच्चों में संस्कारों की अलख जगाने और उन्हें सही दिशा देने में ऐसे शिविरों की उपयोगिता बताई। अंत में उन्होंने शिविर को सफल बनाने वाले शिक्षकों, दानदाताओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
बच्चों ने दिया स्वच्छता का संदेश
शिविर स्थल के पास नेमावर स्थित ग्वाल टेकरी पर फैले कचरे को साफ कर बच्चों ने स्वच्छता का संदेश दिया। यहां बड़ी मात्रा में डिस्पोजल सामग्री और पॉलिथीन फैली हुई थी, जिसे शिविरार्थियों ने उत्साह के साथ एकत्रित किया। इस दौरान सभी ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी ली।
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