हनुमान जयंती पर हवन पूजन के साथ भंडारे प्रसादी के हुए आयोजन 

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विकास पवार बडवाह – हमारे प्राचीन ग्रंथों के अनुसार प्रतिवर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है। इस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था प्रभु श्री राम में अपनी गहरी आस्था के कारण हनुमानजी को विशेष पूजा जाता हैं। हनुमान जयंती हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा हिन्दूओं के एक महत्वपूर्ण त्योहार के रुप में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाई जाती है । जो सांस्कृतिक और परंपरागत तरीके से मनाई जाती है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक हैं ।वह जादुई शक्तियों और बुरी आत्माओं को जीतने की क्षमता रखने वाले देवता के रूप मे पूजे जाते हैं।शास्त्रों के अनुसार हनुमान जयंती हर वर्ष चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है । वहीं पुराणों के अनुसार भगवान शिवजी ने माता अंजना के गर्भ से रुद्रावतार हनुमान के रूप में जन्म लिया था।यह जन्म महाराष्ट्र के नाशिक के अंजनी गिरी नामक स्थान पर हुआ था । उल्लेखनीय है की मंगलवार को शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में श्री हनुमान जयंती हर्षोउल्लास के साथ मनाई गई । स्थानीय और आसपास के सैकड़ो हनुमान मंदिर में अल सुबह से हनुमानजी का चोला श्रंगार किया गया।वही अनेकों मंदिरों में छप्पन भोग का प्रसाद और भंडारे प्रसादी का आयोजन हुआ ।जहा सैकड़ो की तादात में भक्तों ने पूजन पाठ कर भंडारा प्रसादी ग्रहण की ।इस अवसर पर शहर के इंदौर रोड स्थित लड्डू हनुमानजी का विशेष चोला श्रंगार हुआ ।जहा कई भक्तो ने आकर दर्शन लाभ लिए ।वही नर्मदा किनारे स्थित मठ मंदिरों में पूजन अभिषेक के साथ ही भंडारों का आयोजन हुआ। जबकि नगर के भीमेश्वर महादेव मंदिर ,आम वाले हनुमान मंदिर,गणगौर घाट स्थित खेड़ापति हनुमान मन्दिर सहित अन्य मंदिरों में विशेष पूजन अर्चन किया गया ।

पाँच दिवसीय पंचकुण्डीय महायज्ञ हुआ समापन—–

 

हनुमान जयंती के पूर्व आदर्श नगर कालोनी स्थित अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में 5 दिवसीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की शुरुवात हुई थी । जहा हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर हनुमानजी का अल सुबह आकर्षक चोला श्रंगार किया ।जिसके बाद दोपहर 12 बजे महायज्ञ की पूर्णाहुति दी गई ।जिसके पश्चात भंडारे प्रसादी का आयोजन हुआ ।जिसमें कालोनी और आसपास के महिला ,पुरूष सहित बच्चो ने प्रसादी ग्रहण की ।उलेखनीय है कि पांच दिवसीय महायज्ञ देश में सुख शांति,साम्प्रदायिक सद्भाव एवं अच्छी वर्षा के उद्देश्य से किया हर वर्ष किया जाता है ।पांच दिवसीय पंचकुण्डीय महायज्ञ के पहले दिन हवन कुंड में अग्निमंथन कर अग्नि प्रज्ज्वलित की गई ।जिसके बाद प्रथम दिवस गणेश यज्ञ की आहुति डाली गई । वही लक्ष्मीनारायण यज्ञ सम्पन्न हुआ। 23 अप्रैल को दोपहर 12 बजे हनुमान जयंती पर हवन की पूर्णाहुति एवं भंडारे प्रसादी के साथ पांच दिवसीय महायज्ञ का समापन हुआ। पंडित द्वारकाप्रसाद शर्मा ने बताया की अम्बिकेश्वर महादेव मंदिर में हनुमान जयंती के 5 दिन पूर्व होने वाला पंचकुण्डीय महायज्ञ का आयोजन कई वर्षो से निरंतर किया जा रहा है ।

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