
नेहरू पार्क ! शहर का एकमात्र गार्डन जहां रोजाना सैकड़ों लोग सैर-सपाटा, योग सहित ताजा हवा का लुत्फ लेने के लिये पहुंचते हैं। वहीं छोटे-छोटे बच्चे झूले, खिलसपट्टी और झुकझुक में बैठने की आस लेकर यहां आते हैं। लेकिन, इन दिनों बच्चों की ये आस मायूसी में तब्दील हो रही है। कारण, बच्चों की टॉय ट्रेन बंद पड़ी है। वहीं झूले टूट-फूट का शिकार होकर अप्रिय घटना की वजह बने हुए हैं। यही कारण है कि लोग इनसे दूरी बनाए रखना बेहतर समझ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर फिलहाल पार्क में पटरियों का सुधार, गड्ढों का दुरूस्तीकरण, लाइट व फुब्बारे का मरम्मत कार्य जारी है।

अनोखा तीर, हरदा। भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने अमृत-2 योजना अंतर्गत शहर के नेहरू पार्क समेत एक अन्य पार्क का कायाकल्प करने की कवायद अब ठंडे बस्ते में है। इसकी मुख्य वजह योजना अंतर्गत पार्क की करीब डेढ़ एकड़ अनिवार्य है। यही कारण है कि इस सौगात को फिलहाल ग्रहण सा लग गया है। अगर योजना के मापदंड अनुरूप निर्धारित जगह उपलब्ध होती तो शहरवासियों को सर्वसुविधा युक्त पार्क की सौगात तय थी। इसी के मद्देनजर ९ अक्टूबर २०२३ को कार्यपालन यंत्री नगरीय प्रशासन भोपाल राकेश रावत, सहायक यंत्री संभागीय कार्यालय सचिन कडु की टीम यहां पहुंची थी। टीम ने नेहरू पार्क का अवलोकन कर आवश्यक जानकारी जुटाई थी। उनके साथ मुख्य नपा अधिकारी कमलेश पाटीदार, सांसद प्रतिनिधी राजू कमेडिया, समेत नपा के उपयंत्री मौजूद थे। टीम के निरीक्षण के बाद ही पार्क को संवारने की तमाम तैयारियों ने जोर पकड़ा था। लेकिन , अब यह सामने आया है कि पर्याप्त जगह के अभाव में फिलहाल यह सौगात ठंडे बस्ते में है। यहां बताना होगा कि हर साल गर्मी की छुट्टियां शुरू होने के साथ ही स्थानीय नेहरू पार्क मे चहल पहल बढना लाजमी है। हालांकि, शहर के बीचों बीच सबसे बड़े पार्क में लोग खासकर बुजूर्ग , महिलाएं तथा युवा नियमित सैर-सपाटे को पहुंचते हैं। परंतु, इन दिनों बाहर से आने वाले बच्चों के साथ साथ गर्मी से निजात पाने के लिये लोग सुबह-शाम यहां पहुंच रहे हैं। जिसके चलते पार्क में खासी भीड़ देखने को मिल रही है। किंतु , इन सबके बीच शहर का सबसे बड़ा पार्क अब भी कई कमियों से जूझ रहा है। यहां बच्चों के मनोरंजन के लिये करीब 6 लाख रूपये खर्च कर टॉय टे्रन शुरू की थी, जो इन दिनों तकनीकि खामी के चलते बंद पड़ी हैं। वहीं पार्क के मॉ सरस्वती एवं गौमाता प्रांगढ़ में लगे झूले अपनी बहदाली पर आंसू बहा रहे हैं। इतना ही नही, व्यायाम की दृष्टि से पार्क में लगा ओपन जिम रखरखाव के अभाव में बेपटरी हो चुका है। परिणामस्वरूप पहले की तुलना लोगों का उत्साह फीका पड़ने लगा है। ऐसा इसलिये, क्योंकि पार्क में जब ओपन जिम व्यवस्था बहाल हुई तब लोग सुबह-शाम इसका इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब वे मायूस होकर वापस लौट रहे हैं। कारण, व्यायाम के लिये लगे उपकरणों का एलॉयमेंट बिगड़ चुका है। वहीं आवाज सहित अन्य कमियां सीधे तौर पर ध्यान भटकाने के बराबर है। इस बारे में नपा अधिकारी से चर्चा करना चाहा, लेकिन फोन रिसीव नही हुआ।

सुधार एवं मरम्मत की दरकार
इस संबंध में शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि बच्चों के सुविधार्थ झूलों का सुधार एवं मरम्मत कार्य जरूरी है, ताकि छुट्टियों में बच्चे पार्क में आनंद ले सके। साथ ही मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से कोसो दूर रहें। लेकिन यहां टूटे-फूटे झूले बच्चों का उत्साह फीका पड़ रहा है।
बच्चे बोले- ट्रेन कब चलेगी ?
इन दिनों पार्क पहुंच बच्चों को टॉय ट्रेन बंद होने के कारण मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। इस दौरान बच्चे इतमना जरूर पूछ रहे हैं कि अंकल ट्रेन कब शुरू होगी ? बता दें कि पार्क में टॉय ट्रेन, झूले और खिसलपट्टी बच्चों के आनंद और उत्साह का मुख्य केन्द्र है।
कबाड़ में तब्दील हो रहा जिम
इसी तरह पार्क के एक ब्लाक में स्थापित ओपन जिम केवल शोपीस की भूमिका में है, क्योंकि जिम का लगभग सारा सामान टूट चुका है। जिसके चलते लाखों रूपये खर्च कर तैयार किए गए ओपन जिम की उपयोगिता पर गहण सा लगा हुआ है, जिसके सुधार कार्य की बात ने जोर पकड़ने लगी है।
क्या है अमृत-2 योजना ?

10 अक्टूबर २०२३ को ्रपकाशित खबर
केन्द्र सरकार ने वर्ष २०१५ में शहरों के समुचित विकास के लिहाज से अमृत योजना को गति प्रदान की थी। जिसका उद्देश्य शहर में शुद्ध जल, हर घर नल से पानी, रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प तथा सीवरेज प्रबंधन पर फोकस रहा। हाल ही में अमृत- 2 अंतर्गत शहरी विकास को बल दिया है। जिसमें पार्को के नवीनीकरण कार्य को भी शामिल किया है। उसी तारतम्य में नगरीय प्रशासन की टीम ने यहां पार्को को संवारने की संभावनाओं को टटोला था।

