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Friday, 16 October 2026
इंदौर

अब इंदौर में ही उगाया जाएगा दक्षिण भारत का बेशकीमती औषधीय लाल चंदन

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अनोखा तीर इंदौर:-लाल चंदन यानी ‘ब्लड सैंडलवुड’। दो साल पहले आई फिल्म पुष्पा जिन्होंने देखी होगी, उन्होंने लाल चंदन के बेशकीमती होने के तथ्य को जाना ही होगा। यह चंदन बेशकीमती होने के साथ-साथ त्वचा रोग, पेट रोग और स्त्री रोगों में औषधि के रूप में काम करता है। अब यह चंदन इंदौर में भी मिलने की संभावना बन रही है। दरअसल, वन विभाग में शहर स्थित नवरत्न बाग में वन विभाग की नर्सरी में विभाग ने लाल चंदन के 25,000 बीज रोप कर प्रयोग किया है। अब तक लाल चंदन केवल दक्षिण भारत में ही पाया जाता है, किंतु अब इसे इंदौर में भी उगाया जा रहा है। बता दें कि लाल चंदन की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी रहती है।

वन मंडलाधिकारी अधिकारी (डीएफओ) महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि हम लोग लाल चंदन के बीज को नागपुर से लाए और रोप दिया है। जुलाई तक इनके पौधे बनने की संभावना है। अगर यह प्रयोग सफल हुआ, तो शहर की कृषि में कई संभावनाएं खुल जाएंगी। जब गुजरात का नारियल इंदौर में उग सकता है, तो हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि दक्षिण भारत का लाल चंदन भी यहां की धरती पर उपजे।
डीएफओ ने बताया कि लाल चंदन की खेती के लिए विशिष्ट परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, जैसे शुष्क और गर्म जलवायु, पीएच 4.5 से 6.5 वाली अच्छी उपजाऊ मिट्टी। लाल चंदन अत्यधिक विनियमित लकड़ी है, जिसका रंग लाल होता है और इसमें औषधीय गुण होते हैं। लाल चंदन के खेत को ठीक से तैयार करने के बाद मई और जून के बीच रोपण किया जाता है।
इस पौधे के विकास के लिए पर्याप्त जल निकासी, सीमित सिंचाई और कीट नियंत्रण आवश्यक है। विभाग का लक्ष्य इस दुर्लभ प्रजाति को स्थानीय खेतों के लिए अधिक सुलभ बनाना है। इसके विकास और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए उचित देखभाल और खेती के तरीकों के महत्व पर जोर दिया जा रहा है।
इंदौर में निश्शुल्क बटेंगे सभी पौधे
डीएफओ महेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि लाल चंदन के 25,000 पौधे तैयार करना का लक्ष्य है। पौधे तैयार होने के बाद इन्हें शहर के लोगों को निश्शुल्क बांटा जाएगा, ताकि लोग इनका संरक्षण करके इन्हें बड़ा कर सकें। इसके बाद वे इसकी खेती के लिए या पौधे लगाने के लिए प्रेरित हों। सामाजिक संस्थाओं की मदद से यह पौधे शहरवासियों में बांटे जाएंगे ताकि संवेदनशील लोग ही पौधे को लें।
त्वचा और पेट के रोगों में है फायदेमंद
लोकमान्य नगर स्थित शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर डा. अखलेश भार्गव ने बताया कि लाल चंदन चेहरे को सुंदर और बेदाग बनाए रखने में काफी मददगार होता है। लाल चंदन से चंदन आश्रय औषधि तैयार होती है। यह त्वचा और पेट के रोगों में काफी लाभदायक होता है। इसके अलावा लाल चंदन स्त्री रोगों में भी कारगर होता है।
इसे चेहरे पर इस्तेमाल करने से पहले एक बार हाथों पर लगाकर जरूर देख लें। अगर कोई परेशानी न हो, तो ही इसका इस्तेमाल चेहरे पर करें। इसके अलावा लाल चंदन का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों और दवा उद्योग में भी किया जाता है।
खतरे की सूची में है लाल चंदन
अत्यधिक दोहन के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आइयूसीएन) द्वारा इसे ‘खतरे में’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। लाल चंदन पाचन संबंधी समस्याओं और रक्त शोधन में सहायता करता है। लाल चंदन गर्भाशय संबंधी समस्याओं, द्रव प्रतिधारण, रक्त शोधन तथा शराब में स्वाद बढ़ाने वाले एजेंट के रूप में भी काम करता है। चंदन का उपयोग प्रार्थना अनुष्ठानों, सौंदर्य उत्पादों, फर्नीचर, सजावटी वस्तुओं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे विभिन्न चीजों में भी किया जाता है।
अब तक कहां हो रहा तैयार
आमतौर पर लाल चंदन दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश के चार जिलों, चित्तूर, कडप्पा, नेल्लोर, कुरनूल में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में पाए जाते हैं। आंध्र प्रदेश के ये जिले तमिलनाडु की सीमा से सटे हुए हैं। इसके पेड़ करीब 11 मीटर तक ऊंचे होते हैं, लेकिन इसका घनत्व अधिक होता है। एक किलो लाल चंदन की कीमत 5000 रुपये तक होती है, इसलिए इसकी खेती किसानों की इनकम बढ़ाने वाली मानी जाती है।
खूबसूरती में ऐसे काम करता है
लाल चंदन का वैज्ञानिक नाम टेरोकार्पस सैन्टनस है। लाल चंदन का इस्तेमाल कास्मेटिक्स प्रोडक्शन में भी किया जाता है। इसके पाउडर का इस्तेमाल अलग-अलग स्किन संबंधी समस्याओं में राहत दिलाता है। चेहरे के दाग, बेजान त्वचा और कील-मुहांसों को भी यह कम करता है। स्किन ड्राइनेस, झुर्रियों, पिंपल्स, स्किन पिगमेंटेशन को दूर करता है। इसके अलावा लाल चंदन में कई ऐसे गुणकारी तत्व पाए जाते हैं, जो स्किन को पोषण देकर उसकी रंगत निखारने का काम करते हैं। इसका नियमित इस्तेमाल त्वचा की रंगत निखारते हुए मुलायम बनाने का काम करता है।
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