रबी सीजन वर्ष २०२३-२४ में गेहूॅ का रकबा उम्मीदों से कई ज्यादा कम रहा। जबकि चने का रकबा पिछले साल की तुलना में दोगुना टच हो गया। इन सबके बीच मौसम की आंखमिचौली फसलों पर बुरा प्रभाव बनकर टूटा है, जो कि मार्च के पहले सप्ताह में कटाई दौरान सामने आया है। ऐसे में पहले तो गेहूॅ का रकबा कम रहा, वहीं ऊपर से उत्पादन नीचे खिसक गया। दूसरी ओर आवश्यकता के चलते किसान गेहूॅ बेचने के लिये नजदीकी मंडी पहुंच रहे हैं। ऐसी स्थिति में सवाल यह कि शासकीय गेहूॅ खरीदी का लक्ष्य पूरा कैसे होगा ?
अनोखा तीर, हरदा। जिले में अतिरिक्त फसल यानि सोयाबीन और गेहूॅ-चना के अलावा तीसरी ग्रीष्मकालीन मूंग की हौड़ में फसलों का रकबा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पहले जहां गेहूॅ की बंपर आवक की वजह से जिले का नाम शीर्ष पर बना रहा, लेकिन मूंग बुआई की दिशा में चने का रकबा साल दर साल बढ़ने लगा। फलस्वरूप इस साल चने का रकबा ५० हजार हेक्टेयर से सीधे 85 हजार हेक्टेयर पहुंच गया। जबकि गेहूॅ का रकबा ९० हजार हेक्टेयर से 55 हजार हेक्टेयर पर सिमट गया है। ऐसे में गेहूॅ का रकबा कम है, ऊपर से गेहूॅ का उत्पादन २०-२2 क्विंटल से 16-17 क्विंटल पर थमकर रह गया है। वहीं उत्पादन कम होने के बावजूद हरदा समेत तीनों मंड़ियों में गेहूॅ की करीब 15 हजार बोरे की आवक बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह किसानों को नकदी की जरूरत है। आवश्यक कार्यो का भुगतान करने के साथ ही अगली फसल की तैयारी करना है। यही कारण है कि किसान मंडी में गेहूॅ बेचना बेहतर समझ रहे हैं। इन सबके बीच चर्चा यह भी है कि समर्थन मूल्य पर गेहूॅ खरीदी का लक्ष्य आखिर कैसे पूरा होगा ?
खरीदी की कवायद शुरू हो
किसानों के मुताबिक लक्ष्य प्रतिपूर्ति की दिशा में समय पर खरीदी शुरू करने की जरूरत है, ताकि किसान कुछ दिनों का धैर्य रखकर सरकारी खरीदी में शामिल हो सकें। फिलहाल खरीदी की दूर-दूर तक कोई सुगबुगाहट नही होने की स्थिति में किसान के समक्ष यही सबसे बेहतर रास्ता है।
जरूरत के आगे सबकुछ फेल
यह भी सामने आया है कि किसानों को कटाई के तुरंत बाद नकदी की जरूरत रहती है। जिसकी पूर्ति करने के लिये तुरंत गेहूॅ बेचने का फैसला लेना पड़ा। क्योंकि, चार दिन बाद खाद-बीज के लिए भीड़ बढ़ेगी। वहीं कीमत पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में समय गंवाना ठीक नही है।
एक दिन की आवक…
मंडी — गेहूॅ — चना
हरदा — १२३३७ — ४९७१
खिरकिया — १२०७७ — ३८९९
टिमरनी — ६२९६ — २०५०
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